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प्रतापगढ़

सोयाबीन का रकबा घटाया, मक्का और दलहन का बढ़ाया

लगातार एक ही फसल बुवाई से घट रहा उत्पादन

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हंकाई में जुटे किसान
खरीफ का रकबा बढ़ाकर किया एक लाख 93 हजार हैक्टेयर
प्रतापगढ़. कांठल में गत वर्षों से सोयाबीन की अधिक खेती से खेतों की सेहत पर विपरित असर होने लगा है। ऐसे में कृषि विभाग और किसानों ने सोयाबीन का रकबा घटाया है। इसके स्थान पर मक्का और दलहन का रकबा बढ़ाया है। आगामी सीजन के लिए कृषि विभाग ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है। जिसमें इस वर्ष के लिए सोयाबीन का रकबा करीब पांच हजार हैक्टेयर घटाया गया है। इसके स्थान पर मक्का और दलहन का रकबा बढ़ाया गया है। वहीं मूंगफली का रकबा भी बढ़ाया गया है। ऐसे में गत वर्ष की तुलना में करीब साढ़े पांच हजार हैक्टेयर में बढ़ोतरी की गई है। खरीफ का कुल रकबा गत वर्ष से बढ़ाकर एक लाख 87 हजार 882 से एक लाख 93 हजार 465 किया गया है। गौरतलब है कि गत वर्षों से कांठल में खरीफ में व्यावसायिक फसल सोयाबीन की बुवाई काफी की गई। इससे प्रथम कुछ वर्षों में जहां उत्पादन तो बढ़ा था। वहीं गत कुछ वर्षों से लगातार एक ही फसल बुवाई करने से उत्पादन में गिरावट होती गई। अब हालात यह है कि सोयाबीन का उत्पादन आधा ही रह गया है। इसके साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति भी कम होने लगी है। हालात यह है कि अन्य फसलों का भी उत्पादन कम हो रहा है। सभी प्रकार की समस्याओं को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ सलाह दे रहे है कि फसल चक्र अपनाएं। इसी आधार पर कृषि विभाग की ओर से अब सोयाबीन का रकबा घटाया जा रहा है। इसके स्थान पर दो वर्ष के लिए मक्का और दलहनी फसल बोने की सलाह दी जा रही है। इस वर्ष भी इसी प्रकार के लक्ष्य निर्धारित किए गए है।
जिले में खरीफ बुवाई और लक्ष्य का आंकड़ा
फसल 2022-23 2023-24
मक्का 46261 48000
ज्वार 16 20
धान 263 800
दलहन 1718 4460
सोयाबीन 135919 130000
मूंगफली 2427 5000
तिल 101 150
कपास 1155 1500
अन्य 1172 5020
योग 187882 193465
(आंकड़े कृषि विभाग के अनुसार)
यह है फसल चक्र
फसल चक्र का मतलब होता है कि एक ही खेत में दो या दो से अधिक अलग-अलग फसलें एक के बाद एक उगाई जाती हैं। फसल चक्र की योजना में लगातार एक ही फसल को नहीं उगाई जाती है। इसके स्थान पर प्रति वर्ष फसलें बदल-बदल कर बुवाई करते है। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी नहीं होती है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। इससे मिट्टी के पोषक तत्वों में वृद्धि होती है। इसके साथ ही खेत की जैव विविधता को बढ़ावा होता है। वहीं कई प्रकार के खरपतवार और कीटों में कमी होती है।
इस तरह किया रकबे में बदलाव
कृषि विभाग की ओर से खरीफ की सीजन में काफी बदलाव किया गया है। जिसमें सोयाबीन का रकबा एक लाख 35 हजार से घटाकर एक लाख 30 हजार किया गया है। मक्का का रकबा 46 हजार से बढ़ाकर 48 हजार, मूंगफली का ढाई हजार से बढ़ाकर पांच हजार हैक्टेयर किया गया है। दलहन का 17 सौ बढ़ाकर 44 सौ किया गया है।