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किसानों को संतुलित उर्वरक के बारे में बताएं

Tell farmers about balanced fertilizer

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किसानों को संतुलित उर्वरक के बारे में बताएं

किसानों को संतुलित उर्वरक के बारे में बताएं


बिना प्रशिक्षण नही बेच पाएंगें उर्वरक
कृषि विज्ञान केन्द्र पर खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को दिया प्रशिक्षण
प्रतापगढ़. यहां कृषि विज्ञान केन्द्र में खुदरा उर्वरक विके्रताओं को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन डॉ. आर. ए. कौशिक, निदेशक प्रसार शिक्षा, उदयपुर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। डॉ. कौशिक ने बताया कि आजादी के समय देश की हमारे किसानों द्वारा मात्र आधा किलो उर्वरक प्रति हेक्टेयर का उपयोग होता था जो कि बढ$कर वर्तमान में 141 किलो प्रति हेक्टेयर हो गया हैं। किन्तु उर्वरक उपयोग क्षमता मात्र 10 प्रतिशत ही हैं। ऐसे में उर्वरक उपयोग क्षमता बढ़ाने की सख्त आवश्यकता हैं। आज देष को 29.6 करोड़ टन रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता हैं। डॉ. कौशिक ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों के साथ विक्रेताओं की भी यह जिम्मेदारी बनती हैं कि वे अपनी दुकान पर आने वाले किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक देने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में भी जागरुक करें। उर्वरक विक्रेताओं को भी उर्वरक एवं उससे जुड़े विषयों पर पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। डॉ. कौशिक ने बताया कि जिनके पास कृषि में स्नाातक की डिग्री नही हैं, उनको खुदरा उर्वरक विक्रेता का नया लाइसेंस लेने या लाइसेंस नवीनीकरण के लिए 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण लेना अनिवार्य हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. पी. सी. चपलोत ने प्रशिक्षणाथियों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के बारें में जानकारी दी। असंतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने से सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी फसलों में नजर आने लग गई हैं। मुख्य रुप से जस्ता, लोहा आदि की कमी हमारी मिट्टी में देखी जाने लगी हैं। डॉ. चपलोत ने बताया कि गोबर की खाद अथवा हरी खाद का प्रयोग कर हम खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ा सकते हैं। उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरकों का ही विक्रय करें एवं हमेशा स्टॉक रजिस्टर में आदानों का इन्द्राज करें। जिससे उनका रिकार्ड हमेशा सही रहेगा। सहायक निदेशक (उद्यान) ब्रजवासी मीणा ने बताया कि उन्नत बीज के साथ रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से ही देश में हरित क्रान्ति संभव हुई। किन्तु खाद्यान्न में आत्मनिर्भर होने के बाद अब रासायनिक उर्वरकों के साथ 50 प्रतिशत पोषक तत्व कार्बनिक खाद से ही देने चाहिए। जिससे मृदा की गुणवत्ता में सुधार हो सकें। सहायक निदेशक (सांख्यिकी) गोपालनाथ योगी ने उर्वरक नियन्त्रण आदेश के बारें में प्रतिभागियों को अवगत करवाया। उन्होनें बताया कि उर्वरक अवाश्यक वस्तु अधिनियम में आती हैं। इसलिए इसके विक्रय पर सरकार का नियन्त्रण रहता हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र, डूंगरपुर के प्रभारी डॉ. सी. एम. बलाई ने लवणीय व क्षारीय भूमि एवं इसके सुधार के बारें में जानकारी दी। ईफको जिला प्रभारी मुकेश आमेटा ने नैनो तथा जैविक उर्वरको के बारें में, केन्द्र के तकनीकी सहायक डॉ. रमेश डामोर ने मृदा परीक्षण हेतु नमूना लेने की जानकारी दी।