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लाइसेंस का इंतजार: एलोवेरा व आंवला के उत्पाद बनाए जाएंगे

सुचारू रूप से संचालन के लिए मशीनें भी पहुंची

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लाइसेंस का इंतजार: एलोवेरा व आंवला के उत्पाद बनाए जाएंगे

लाइसेंस का इंतजार: एलोवेरा व आंवला के उत्पाद बनाए जाएंगे


प्रतापगढ़. जिले में वन उपज के शुद्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चार वर्ष पहले ही तीन स्थानों पर लघु वन उपज प्रसंस्करण केन्द्र बना दिया गया है। जिससे यहां एलोवेरा और आंवला के उत्पाद तैयार करने है। इसके साथ ही विभाग की ओर से इन संस्करणों को विधिवत रूप से संचालन के लिए मशीनों और अन्य संसाधन भी मंगवा लिए गए है। ऐसे में विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा के तहत लाइसेंस लेना है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। लाइसेंस मिलने के बाद यहां प्रसंस्करण इकाइयां विधिवत रूप से संचालित हो सकेगी। जिससे यहां के लोगों को शुद्ध हर्बल उत्पाद भी मिल सकेंगे। गौरतलब है कि वन विभाग की ओर से वन उपज संग्रहण, भंडारण और बिक्री केन्द्र बनाने के लिए दो वर्ष पहले यहां बांसवाड़ा रोड स्थित करमदिया नर्सरी में लघु वन उपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है। इसमें मशीन भी लगा दी गई है। जिससे यहां एलोवेरा और आंवला के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसमें विशेष रूप से ऐलोवेरा और आंवला का ताजा और शुद्ध जूस मिल सकेगा।
प्रसंस्करण में लगाए विभिन्न यंत्र
यहां करमदिया नर्सरी में भवन बनकर तैयार हो गया है। इसमें प्रोसेङ्क्षसग के लिए प्रायोगिक तौर पर उत्पाद भी बनाए गए थे। क्षेत्रीय वन अधिकारी दाराङ्क्षसह राणावत ने बताया कि जिसमें सौलर पैनल, डीप फ्रीजर, सौलर गीजर, आरओ यूनिट प्लांट, स्टोर रूम, विक्रय केन्द्र का निर्माण, पैङ्क्षकग मशीन मय सामग्री, इलेक्ट्रिक तोल कांटा, आलमारी और रैक, इलेक्ट्रिक फिङ्क्षटग, पानी की टंकी व पाइप फिङ्क्षटग, बर्तन, टूल्स आदि भी लगा दिए गए है।धरियावद नाका स्थित वन विभाग कार्यालय परिसर में विक्रय केन्द्र भी बनकर तैयार हो गया है। प्रभारी फोरेस्टर भूपेन्द्रङ्क्षसह ने बताया कि यहां विभिन्न उत्पाद का विक्रय किया जाएगा। वन विभाग की ओर से जिले में दो वर्ष पहले तीन स्थानों पर लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र बनाए जा चुके है। जिसमें प्रतापगढ़ के बांसवाड़ा रोड स्थित करमदिया नर्सरी, धरियावद और पीपलखूंट में केन्द्र बनाए गए है। जबकि बांसी में पांच वर्ष से प्रसंस्करण केन्द्र चल रहा है। जिसमें एलोवेरो, आंवला का जूस व अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा रहे है। स्थाई रूप से वन सुरक्षा समितियों को रोजगार
विभाग की ओर से बनाए गए लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र में विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह उत्पाद स्थानीय वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से ही तैयार किए जाने है। इन उत्पादों को तैयार होने के बाद विभाग की ओर से विपणन भी कराए जाएंगे। जिससे समितियों के सदस्यों को रोजगार मिलेगा। इसके लिए समितियों के सदस्यों को अन्य स्थानों पर ले जाकर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
प्रसंस्करण के साथ प्लांटेशन लगाए
बांसवाड़ा रोड स्थित करमदिया नर्सरी में भवन बनाया जा चुका है। इसके लिए 13 लाख 50 हजार रुपए लगाए गए है। यह कार्य मनोहरगढ़ वन सुरक्षा समिति के माध्यम से कराया गया है। यहां एलोवेरा के लिए 50 हैक्टेयर में प्लांटेशन भी लगाया गया है। इसी प्रकार पंडावा में भी 100 हैक्टेयर में प्लांटेशन लगाया गया है। जिसमें ऐलोवेरा और अन्य औषधीय पादप लगाए गए है।
सभी तैयारियां पूरी, खाद्य सुरक्षा लाइसेंस का इंतजार
जिले में वन विभाग की ओर से वन उपज संग्रहण, भंडारण और बिक्री के लिए तीन स्थानों पर प्रसंस्करण इकाइयां बनाई गई है। इनकों विधिवत रूप से संचालन के लिए अब आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध हो गई है। इसमें विशेष रूप से ऐलोवेरा और आंवला का ताजा और शुद्ध जूस मिल सकेगा। इसके लिए विक्रय केन्द्र भी बनाया गया है। अब खाद्य सुरक्षा के लिए लाइसेंस के लिए प्रक्रिया चल रही है।
सुनील कुमार, उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़.