इलाहाबाद. 23जनवरी अधिवक्ता दीपचन्द्र शुक्ला हत्या काण्ड का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच एवं सिविल लाइंस की पुलिस ने शनिवार को चार अधिवक्ता समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया और हत्या में प्रयुक्त कार एवं पत्थर बरामद किया। उक्त मामले का खुलासा करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के.एस.इमैनुएल ने बताया कि हत्या की वजह कार्लगल का न उपलब्ध हो पाना और शराब के नशे में विवाद सामने निकलकर आया है। पकड़े गये हत्यारों में चार अधिवक्ता है जबकि एक अधिवक्ता का रिश्तेदार है।
हत्या में शामिल अधिवक्ता जयराज सिंह पुत्र बी.पी. सिंह निवासी न्यू ममफोर्डगंज थाना कर्नलगंज, अधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा पुत्र राम नरेश मिश्रा निवासी फ्लैट सं01 बसंत बिहार ड्रमंड रोड थाना सिविल लाइंस, अधिवक्ता इन्दीवर पाण्डेय पुत्र लक्ष्मी कान्त पाण्डेय निवासी स्टेचीरोड थाना सिविल लाइंस, अधिवक्ता अभिषेक मयंक रस्तोगी उर्फ अंशू पुत्र नरेन्द्र रस्तोगी निवासी कालिन्दीपुरम थाना धूमनगंज और अरूण कुमार तालान पुत्र गजन सिंह तालान निवासी ग्राम वैना थाना टप्पल अलीगढ़ है।
श्री मैनुएल ने बताया कि 17 जनवरी को सिविल लाइंस थाने पर अधिवक्ता दीपचन्द्र शुक्ला की गुमशदुगी दर्ज हुई और इसी क्रम में 17/18 जनवरी की रात धूमनगंज थाना क्षेत्र के सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन के पास एक अधजला शव पाया गया। जिसकी पहचान बाद में अधिवक्ता के रूप में की गई। हत्या को लेकर आक्रोशित एवं आन्दोलन को देखते हुए परिजनों से पूंछताछ की गई तो परिवार के लोगों ने किसी से रंजिश की बात से साफ मना कर दिया।
इसके बाद मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक अपराध रामाकान्त प्रसाद और नगर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार यादव के नेतृत्व में क्षेत्राधिकारी प्रथम रूपेश एवं क्षेत्राधिकाी द्वितीय राजबीर सिंह को कई टीमों के साथ लगाया गया। जिसमें इन्टेलिजेन्स विंग प्रभारी जय प्रकाश राय और प्रभारी सर्विलांस सुनील दुबे को आवश्यक दिशा निर्देश देकर लगाया गया। हत्या का अनावरण चुनौती पूर्ण था और जिसमें जांच के दौरान अधिवक्ताओं की ओर सूई घूम गई। जांच के दौरान
22 जनवरी को जय प्रकाश राय और सुनील दुबे सिविल लाइंस थाने के पास सिविल लाइंस प्रभारी महेश पाण्डेय के साथ खड़े होकर बातचीत कर रहे थे इस बीच मुखबिर से सूचना मिली कि अधिवक्ता की हत्या में शामिल कुछ लोग सफेद रंग की टोयटा कोरोला के साथ खड़े है। वह कहीं भागने की फिराक में है। टीम ने वहां दबिस दिया तो हत्या में प्रयुक्त कार के साथ पकड़े गये।
पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि अरूण कुमार तालान एवं अभिषेक मंयक रस्तोगी एवं अन्य ने बताया कि 17 जनवरी को तीन बजे के बीच हाईकोर्ट पेट्रोल पम्प के पास लक्ष्मी भोजनालय के सामने अरूण तालान अपने मुह बोले मामा अभिषेक मयंक रस्तोगी के साथ अपनी कार टोयटा कोरोला से दीपचन्द्र के साथ खड़ा था, आपस में बातचीत के दौरान ही दीपचन्द्र शुक्ला ने फोन करके जयराज सिंह को व अजय कुमार मिश्रा को फोन करके बुला लिया। इसी बीच हमलोग भी गाड़ी में बैठकर शराब व बियर पी रहे थे, तथी जयराज सिंह व अजय मिश्रा भी आ गये वो लोग नशे में थे, इस बीच दो क्वाटर दारा और बियर मामा के दिये रूपये से लेकर आया। जयराज सिंह एवं अजय मिश्रा ने दीपचन्द्र शुक्ला से कहा कि तुम लड़की (कालगर्ल ) बुलाने वाले थे कब आयेगी।
काल गर्ल के इंतजाम में हमलोग दीपचन्द्र शुक्ला के कहने पर ममफोर्डगंज गये, वहां 10-15 मिनट तक घूमे, दीपचन्द्र शुक्ला ने एक दो बार फोन भी किय किन्तु ब्वस्था न हो पाने के कारण पुनः घूमकर लक्ष्मी भोजनालय हाईकोर्ट पहुंच गये तभी इन्द्रीवर पाण्डेय भी आ गये। जयराज सिंह ने कहा कि मेरी स्कूटी से दारू की बोतल रखी है निकालकर ले आओं जिसकों मैं लेकर आया और फिर सभी लोगों ने पीने लगे एवं इस दौरान दीपचन्द्र शुक्ला जयराज सिंह एवं अजय मिश्रा काफी नशे में हो गये थे एवं लड़की व्यवस्था के लिए दीपचन्द्र शुक्ला पर दबाव लगाने लगे।
विवाद बढ़ता गया और इस बीच ट्रिपल आईटी झलवा के पास किसी कालगर्ल की होने की बात कहकर सभी लोग कार से चल दिये। झलवा की ओर जाते समय जयराज सिंह ने कार को सुबेदारगंज रेलवे स्टेशन की तरफ यहकर मुड़वा दियसा कि लड़की को इसी तरफ बुलवा लेंगे। सुबेदारगंज में जंगल की ओन जाने पर पेशाब करने के लिए कार को जयराज सिंह ने रूकवा दिया तभी जयराज सिंह एंव दीपचन्द्र शुक्ला में लड़की के व्यवस्था करने हेतु रूपये दिये गये इस दौरान गाली गुप्ता कहा सुनी विवाद बढ़ गया और दीपचन्द्र के सिर में पत्थर से वारकरके हत्या कर दी गई।
इसके बाद एक बड़ी प्लास्टिक की पन्नी इन्दवर पाण्डेय ढूढ कर लाये और दीपचन्द्र शुक्ला के सिर को पन्नी पहनाकर बांध दिया और उसे कार की डिग्गी में भरकर पुनः हाईकोर्ट चैराहे पर आये जहां से एक बोतल पर पेट्रोल एवं एक पुराने कम्बल को गाड़ी मेंरकर फिर वहीं गयी और शव को कम्बल में लपेटकर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दिया और वहां से भाग निकले और जाते समय जयराज सिंह,इन्दीवर पाण्डेय एवं अजय मिश्र ने मुझे धमकी दिया कि इस घटना के सम्बन्ध में किसी को कुछ भी मत बताना।