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मालगाड़ी के ड्राइवर का हाईवोल्टेज ड्रामा, सवा घंटे तक बंद रहा फाटक

9.5 घंटे काम के बाद थके लोको चालक ने मालगाड़ी चलाने से मना कर दिया। जिसके बाद काफी देर तक ड्रामा चला। वहीं इस ड्रामे के कारण सवा घंटे फाटक बंद रहा। जिससे जनता बेहाल हुई और लंबा जाम लगा रहा।

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Railway News: उत्तर प्रदेश के लालगोपालगंज रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। एक मालगाड़ी के लोको पायलट ने अपनी ड्यूटी खत्म होने का हवाला देते हुए ट्रेन चलाने से साफ इनकार कर दिया। इस नाराजगी के चलते सवा घंटे तक रेलवे फाटक बंद रहा और सड़क पर भीषण जाम लग गया। पुलिस से लेकर रेलवे के बड़े अफसरों तक को ड्राइवर को मनाने में पसीने छूट गए।

क्या है पूरा मामला?

पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से चलकर ऊंचाहार जा रही एक मालगाड़ी जब लालगोपालगंज स्टेशन पहुंची, तो वहां का माहौल सामान्य था। स्टेशन अधीक्षक को कंट्रोल से निर्देश मिला कि लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस को पास देने के लिए मालगाड़ी को प्लेटफार्म नंबर-2 पर रोका जाए। निर्देशानुसार मालगाड़ी को खड़ा कर दिया गया। इंटरसिटी गुजरी और इसके बाद मालगाड़ी को आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी दिखाई गई, लेकिन यहीं से असली ड्रामा शुरू हुआ।

ड्राइवर का तर्क,9.5 घंटे से ड्यूटी पर हूं

जैसे ही मालगाड़ी को रवाना होने का इशारा मिला, लोको पायलट ने इंजन बंद कर दिया। ड्राइवर का कहना था कि मेरी ड्यूटी का समय खत्म हो चुका है, मैं ओवरटाइम कर रहा हूं और अब आप लोगों ने मुझे प्लेटफार्म पर रोककर मेरी नाराजगी और बढ़ा दी है। मैं 9:30 घंटे से अधिक समय से लगातार मालगाड़ी चल रहा हूं। अब बर्दाश्त से बाहर है।

राहगीरों की बढ़ी मुसीबत, पुलिस भी रही बेअसर

ड्राइवर की इस जिद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा। ट्रेन खड़ी होने की वजह से पश्चिमी रेलवे क्रॉसिंग का फाटक गिरा रह गया। जेठवारा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। भीषण ठंड के बीच लोग हॉर्न बजाते रहे, लेकिन पायलट टस से मस नहीं हुआ। सूचना मिलते ही आरपीएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। खाकी वर्दी वालों ने ड्राइवर को समझाने और थोड़ा दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।

बड़े अफसरों ने की मान-मनौव्वल

जब स्थिति बेकाबू होने लगी, तो मामले की जानकारी रेलवे के उच्च अधिकारियों को दी गई। कंट्रोल रूम से फोन पर ड्राइवर से लंबी बात हुई। काफी देर तक चले 'अनुनय-विनय' और आश्वासन के बाद ड्राइवर का गुस्सा शांत हुआ। करीब 1 घंटे 17 मिनट की देरी के बाद, दोपहर 12:43 बजे मालगाड़ी वहां से रवाना हुई और तब जाकर फाटक खुला।

सुरक्षा और सिस्टम पर सवाल

यह घटना केवल एक ड्राइवर की नाराजगी का मामला नहीं है, बल्कि रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठता है, लोको पायलटों पर काम का अत्यधिक दबाव क्या हादसों को दावत दे रहा है। वहीं डीआरएम लखनऊ सुनील कुमार वर्मा ने बताया, लोको पायलट की ड्यूटी और मालगाड़ी को रोके जाने के कारणों की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।