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एयर फोर्स के विंग कमांडर से संत बने कपिल सिंह, अब लाखों भक्त जानते हैं इस नाम से

कुंभ मेले में आए पायलेट बाबा, पत्रिका को बताई पायलेट से संत बनने तक की ये कहानी।

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saint Pilot baba

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प्रयागराज। एयर फोर्स के विंग कमांडर रहे कपिल सिंह ने कई युद्ध लडऩे के बाद संत बन गए। नौकरी छोड़ उन्होंने धर्म की ऐसी उड़ान भरी की अब देश-विदेश में लाखों भक्त हैं। भक्तों ने उन्हें पायलट बाबा का नाम ही दे दिया है। रिपोर्ट सुधीर पंडित।

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ये है स्टोरी
भारत-पाकिस्तान व बांग्लादेश की लड़ाइयों में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले कपिल सिंह का जीवन एक घटना ने पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने 1961, 1962 और बांग्लादेश का युद्ध भी लड़ा। पायलट बाबा ने बताया कि 1966 में स्काय गार्ड के दौरान चायना बार्डर से बचने के लिए अधिक ऊंचाई पर चले गए। अधिक ऊंचाई पर जाने से मिंग का इंजन फैल हो गया। इसके कारण विमान लगातार नीचे की ओर आने लगा। बाबा ने बताया कि तभी उन्हें एहसास हुआ कि एक संत ने उनकी मदद करते हुए सुरक्षित जमीन पर उतारा। एक सामान्य व्यक्ति के भेष में वे मुझे कई बार खतरों से आगाह कर चुके थे। वे बाद में मेरे गुरु बने। 1971 में एयरफोर्स छोडक़र आध्यत्म की ओर मूड़ गया। तब से आध्यत्म की ओर बढ़ता गया। पायलट बाबा के अब 150 देशों में बड़ी संख्या में भक्त हैं। विदेशों से बड़ी संख्या में आकर बाबा के आश्रम में श्रद्रालु रुकते हैं और योग के साथ ही साधना करते हैं।

हरि बाबा के बने भक्त
विमान और कपिल सिंह की जान बचाने वाले संत हरि बाबा के बाद में शिष्य बने। उन्होंने उसके बाद साधान की। अब भक्तों को उनके जीवन के दुश्मन से लडऩा सिखा रहे हैं। विदेशी महिलाएं और पुरुष भक्त महिनों तक रहकर साधना करने के साथ ही हिंदी बोलने के साथ ही भजन भी करने लगे हैंं।