19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर हुए रिटायर, कहा- न्यायपालिका को मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर मंगलवार को रिटायर हो गए। उन्होंने अपने विदाई भाषण में कहा कि समाज को सभ्य बनाए रखने के लिए एक मजबूत न्यायपालिका की आवश्यकता है।

2 min read
Google source verification
Govind Mathur

Govind Mathur

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर मंगलवार को रिटायर हो गए। उन्होंने अपने विदाई भाषण में कहा कि समाज को सभ्य बनाए रखने के लिए एक मजबूत न्यायपालिका की आवश्यकता है। भारत को और अधिक सभ्य बनाने के लिए, न्यायपालिका को मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है। मुख्य न्यायाधीश माथुर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित विदाई समारोह में कहा कि हम एक प्रतिष्ठित और सम्मानित संस्थान का हिस्सा हैं। लाखों भारतीय हम पर विश्वास जताते हैं। यह केवल न्यायपालिका है जो संवैधानिक नैतिकता के लिए मजबूती से खड़ा हो सकता है। यह न्यायपालिका है जो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करती है।

डॉ अंबेडकर मेरे लिए 'गरीबों के भगवान'-
गोविंद माथुर ने कहा कि संयोग की बात है कि वह डॉ भीमराव अंबेडकर के साथ अपना जन्मदिन साझा करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार 1970 में डॉ अंबेडकर का नाम सुना था, जब वह महाराष्ट्र में अपने रिश्तेदार के घर जा रहे थे। तभी उन्होंने डॉ अंबेडकर की तस्वीर को नौकर के घर पर देखा। डॉ अंबेडकर को मुझे "गरीबों के देवता" के रूप में पेश किया गया। उन्होंने कहा, तब से वह (डॉ अंबेडकर) मेरे लिए 'गरीबों के भगवान' हैं। मैंने उनके आदर्शों को संजोया है, जो हमारे संविधान में परिलक्षित होते हैं"।

संवैधानिक मूल्य मेज पर बनाई गई कोई चीज नहीं है-
चीफ जस्टिस माथुर ने संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक नैतिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारा संविधान हमारे बहु-वर्गीय समाज के हर वर्ग का ख्याल रखता है। जब यह (संविधान) संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता को संदर्भित करता है, तो वातावरण में गरीबों के उत्थान, वंचितों और प्रत्येक नागरिक को समान दर्जा देने की गूंज होती है। हमारे संवैधानिक मूल्य मेज पर बनाई गई कोई चीज नहीं है। ये मूल्य कई महान प्रयोगों, लंबे अनुभव और महान संघर्ष के बाद प्राप्त हुए हैं। ये संवैधानिक नैतिकता है, जो न्याय प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं। ये संवैधानिक मूल्य, वे मानक हैं, जो एक सभ्‍य समाज बनाते हैं।

चीफ ज‌स्ट‌िस के महत्वपूर्ण फैसले-
इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ ज‌स्ट‌िस के रूप में सीजे गोविंद माथुर ने नागरिक स्वतंत्रता संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत डॉ कफील खान की नजरबंदी और यूपी सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए "नेम एंड शेम" के बैनर हटाने के लिए दिए गए फैसले शामिल हैं। माथुर ने ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए विरोधी प्रदर्शनों में हुई हिंसा के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश भी दिया था। वहीं कोविड के दौरान, उनकी बेंच ने प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए स्वतः संज्ञान लेने के आदेश पारित किए थे।

जीवन परिचय-
जस्टिस गोविंद माथुर ने राजस्थान हाईकोर्ट में कानून की प्रैक्टिस शुरू की थी। उन्हें दो सितंबर 2004 को राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया गया। 29 मई 2006 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनको पदोन्नत किया गया। 21 नवंबर 2017 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया। 24 अक्टूबर 2018 को, सबसे वरिष्ठ जज होने के नाते, उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। 10 नवंबर, 2018 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। 14 नवंबर 2018 को, उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।