
बीमार पड़े अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद:प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर बड़ा विवाद हुआ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान के लिए पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनके रथ और पालकी को रोक दिया। इससे उनके शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई। शंकराचार्य ने स्नान करने से इनकार कर दिया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने सरकार पर साधु-संतों का अपमान करने का आरोप लगाया।
रविवार को मौनी अमावस्या के पावन मौके पर करोड़ों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए उमड़े। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने करीब 200 शिष्यों के साथ रथ और पालकी पर सवार होकर संगम तट की ओर बढ़े। लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने कहा कि पैदल चलकर स्नान करें। शिष्यों ने इस पर विरोध किया, जिससे झड़प हो गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति के जत्था आया था और बैरिकेड तोड़े गए। शंकराचार्य ने दावा किया कि पुलिस ने बुजुर्ग संतों और बच्चों को भी धक्का दिया और मारपीट की।
घटना के बाद शंकराचार्य बहुत नाराज हुए। उन्होंने कहा कि सरकार साधु-संतों और शंकराचार्यों का तिरस्कार कर रही है। ऐसा लगता है जैसे खुद को संतों से बड़ा समझ रही हो। उन्होंने योगी सरकार पर अपमान का आरोप लगाया और स्नान बहिष्कार कर दिया। वे संगम तट पर ही धरने पर बैठ गए। उनके साथ कंप्यूटर बाबा जैसे अन्य संत भी शामिल हुए। शंकराचार्य ने कहा कि बड़े अधिकारी संतों को मार रहे हैं, यह बहुत दुखद है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बयान अक्सर विवादों में रहते हैं। वे मोदी सरकार और बीजेपी की नीतियों की खुलकर आलोचना करते हैं। पहले उन्होंने कहा था कि 10 साल में गौ-हत्या पर देशव्यापी बैन नहीं लगा, इसलिए सच्चा हिंदू प्रधानमंत्री कभी नहीं रहा। उन्होंने सरकार को 33 दिन का अल्टीमेटम दिया था कि गाय को राष्ट्र माता घोषित करो, वरना आंदोलन होगा। बांग्लादेश में शेख हसीना को शरण देने पर भी सरकार की आलोचना की। नेपाल में हिंसा के बाद कहा कि भारत में भी विद्रोह की आशंका है।
उन्होंने वाराणसी (काशी) में 150 से ज्यादा प्राचीन मंदिर तोड़ने का आरोप लगाया। कहा कि मोदी ने वो किया जो औरंगजेब भी नहीं कर सका- पुराणों में उल्लिखित मंदिरों का कत्लेआम। ज्ञानवापी मामले पर बोले कि अगर इसे विचार योग्य माना गया तो अन्य जगहों पर भी जहां मंदिर तोड़े गए, लड़ाई लड़ी जाएगी और सब वापस मिलेगा।
राहुल गांधी पर भी विवादास्पद टिप्पणी की। कहा कि वे हिंदू नहीं हैं, इसलिए राम मंदिर में उन्हें घुसने नहीं देना चाहिए।
इस घटना पर सपा के नेता अखिलेश यादव ने जांच की मांग की। उन्होंने संतों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। प्रशासन ने कहा कि भीड़ के कारण सुरक्षा के लिए रोका गया और अनुमति नहीं थी। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि CCTV में सबूत हैं।
Updated on:
19 Jan 2026 09:20 am
Published on:
19 Jan 2026 09:11 am
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