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सहायक प्रोफेसर पदों पर भर्ती अब याचिका के निर्णय के अधीन, कोर्ट ने आयोग व राज्य सरकार से मांगा जवाब

कोर्ट ने कहा कि भर्ती के तहत नियुक्ति होती है तो वह याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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Allahabad High court

इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज की सहायक प्रोफेसर पद की भर्ती में आरक्षण नियमों का उल्लंघन किए जाने की वैधता के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार व आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती के तहत नियुक्ति होती है तो वह याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने उत्तम सोलंकी व दो अन्य की याचिका पर दिया है।

मालूम हो कि आयोग ने 60 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती का निकाला, जिसमें से 30 पद सामान्य वर्ग, 10 पद अन्य पिछड़ा वर्ग, 13 पद अनुसूचित जाति एवं एक पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया। इसके बाद एक संशोधन द्वारा सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के पदों की संख्या 30 से घटाकर दस कर दी गई और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 30 पद अनुसूचित जाति के लिए 20 पद कर दिए गए। जन जाति के लिए कोई पद आरक्षित नहीं किया गया। जिसे आरक्षण कानून के विपरीत करार देते हुए चुनौती दी गई है।

आयोग के अधिवक्ता का कहना है कि डाक्टर विश्वजीत सिंह के फैसले के अनुसार आयोग ने यह संशोधन किया है। आयोग ने डाक्टर विश्वजीत सिंह केस का पालन करते हुए पदों का पुनर्निर्धारण किया है। साथ ही याचियों ने 19 जून 2014 एवं 30 जुलाई 2014 की अधिसूचनाओ को चुनौती नहीं दी है। और चयनित अभ्यर्थियों को भी याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है। याची ने संशोधन अर्जी दाखिल कर इन दोनों आदेशों को चुनौती देने के लिए कोर्ट से 1 सप्ताह का समय मांगा। याचिका की सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

BY- Court Corrospondence


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