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Magh Mela: अहंकार के ‘ताले’ को खोलने निकले चाबी वाले बाबा; पास में 1 मीटर लंबी चाबी, फिर भी किस बात का मलाल

Magh Mela: अहंकार के 'ताले' को खोलने चाबी वाले बाबा माघ मेले में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनके पास कुल 25 से ज्यादा चाबियां हैं। हालांकि उनको एक बात का मलाल है।

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प्रयागराज माघ मेला 2026: कौन हैं चाबी वाले बाबा? फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

Magh Mela: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में संतों का एक अद्भुत जमावड़ा संगम तट देखने को मिल रहा है। अपने-अपने उद्देश्यों के साथ सभी संत माघ मेले में पहुंचे हैं।

Magh Mela 2026: चर्चा में 'चाबी वाले बाबा

एक तरफ माघ मेले में जगद्गुरु संतोष दास सतुआ बाबा जहां लग्जरी गाड़ियों के लिए मीडिया में चर्चा में हैं, तो वहीं फटीचर बाबा राम नाम का पाठ मेले में आए श्रद्धालुओं को संगम की रेती पर पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा माघ मेले में रायबरेली से आए 'चाबी वाले बाबा' भी चर्चा में हैं। हरिश्चंद्र विश्वकर्मा, जिन्हें चाबी वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है वह मेले में कौतूहल का केंद्र बने हुए हैं। चाबी वाले बाबा के पास लगभग 30 चाबियां हैं, जिनमें से 1 मीटर लंबी चाबी हमेशा उनके हाथ में ही रहती है।

Prayagraj Magh Mela 2026: ई-रिक्शा को 'जन चेतना रथ' नाम दिया

स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर सत्य, प्रेम और सद्भाव का संदेश चाबी वाले बाबा जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। अब तक वह 30 जनपदों की यात्रा कर चुके हैं। चाबी वाले बाबा ने अपने ई-रिक्शा को 'जन चेतना रथ' नाम दिया है। जिसमें सभी चाबियों के साथ अपनी गृहस्थी भी समाहित उन्होंने की है भारत माता और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें 'जन चेतना रथ' के सामने लगी हुई हैं। सभी चाबियों पर राम लिखा हुआ है।

Magh Mela 2026: क्या बोले चाबी वाले बाबा

चाबी वाले बाबा का कहना है कि 2008 से उन्होंने लोभ, मोह, भ्रष्टाचार, अहंकार, अधर्म और असत्य जैसी बुराइयों की चाबियां तैयार की हैं। जिससे लोग इनसे दूर रह सकें।

Prayagraj News: चाबी वाले बाबा को किस बात का मलाल?

हालांकि, चाबी वाले बाबा को मेला क्षेत्र में एक भी बिस्वा जमीन नहीं मिलने से वह नाराज हैं। उनका कहना है कि उन्होंने लगातार आवेदन किया, लेकिन अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें शिविर लगाने के लिए जमीन मिल जाए, तो धर्म प्रचार में आसानी होगी।

मौनी अमावस्या पर लोगों की भीड़

बता दें कि रविवार (18 जनवरी) को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) के दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में घाटों पर पहुंचे। जहां उन्होंने आस्था की डुबकी लगाई। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई आधुनिक तरीके अपनाए। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिले।