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सरकारी आवास खाली नहीं करने पर पुलिस विभाग को नियमानुसार किराया लेने का निर्देश

कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने 16 जनवरी 2017 के शासनादेश से तय किया कि कब्जा न छोड़ने पर पेनल रेन्ट देना होगा।

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सरकारी आवास

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस महकमे में तबादले के बाद भी सरकारी आवास का कब्जा न सौंपने पर स्टैण्डर्ड रेन्ट या पेनल रेन्ट विवाद को लेकर दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने 16 जनवरी 2017 के शासनादेश से तय किया कि कब्जा न छोड़ने पर पेनल रेन्ट देना होगा। इस आधार पर शासनादेश से पहले का स्टैण्डर्ड किराया लगेगा और बाद में 16 जनवरी से पेनल रेन्ट देना होगा।

कोर्ट ने उपनिरीक्षक राम कुमार मिश्र जिन्हें झांसी से औरेया भेजा गया है, उन्हें तीन माह में बकाया किराया जमा करने का आदेश दिया है। इससे पहले विभाग को शासनादेश से पहले स्टैण्डर्ड किराया व बाद में पेनल किराया तय कर जमा राशि समायोजित करने का निर्देश दिया है। बकाया किराया न देने के कारण याची को भवन किराया भत्ते का भुगतान नहीं किया जा रहा है।


यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने रामकुमार मिश्र की याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता विजय गौतम ने बहस की। इनका कहना था कि याची 27 मार्च 2011 को झांसी से औरेया भेजा गया। झांसी के सरकारी आवास खाली न करने के कारण एसएसपी झांसी ने 22 दिसम्बर 2015 के आदेश से 9 लाख एक हजार 342 रूपये पेनल किराये की मांग की। बिना पूरा किराया दिये मात्र एक लाख 60 हजार जमा कर याची ने 10 अक्टूबर 2010 को आवास खाली कर दिया।

याची ने शासनादेशों के हवाले से कहा कि रेंज के भीतर तबादले पर कर्मी को सरकारी आवास कायम रख सकता है और उनसे स्टैण्डर्ड किराया ही लिया जायेगा। सरकार ने 16 जनवरी 2017 को तय किया कि हेड क्वार्टर का तात्पर्य जिले का मुख्यालय है, न कि रेंज के। इसलिए इस तिथि से पहले उससे स्टैण्डर्ड रेंट ही लिया जा सकता है। सरकार पेनल रेंट नहीं ले सकती। कोर्ट ने याची को सभी तथ्य एसएसपी के समक्ष रखने का समय देते हुए उसे विभाग द्वारा तय करने का निर्देश दिया है।