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मृतक आश्रितों की नियुक्ति, अल्पसंख्यक कालेजों के अधिकार में बाधा नहीं: हाईकोर्ट

नियुक्ति पर छह सप्ताह में प्रबंधन कमेटी को निर्णय लेने का आदेश

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Allahabad High court decision on Recruitment

Allahabad High court decision on Recruitment

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि टीचरों के कल्याण के लिए बने रेग्यूलेशन अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन के उनके मूल अधिकारों के विपरीत नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 30 (1) के तहत मिले अधिकार पूर्ण नहीं हैं। स्टाफ एवं अध्यापकों की प्रोन्नति में रेग्यूलेशन लागू किए जा सकते हैं।


हाईकोर्ट ने कहा कि अल्पसंख्यक कालेजों में मृतक आश्रित कोटे में आश्रितों की निुयक्ति देने का आदेश कालेज के प्रबंधन के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं होगा। कोर्ट ने प्रतीक जैन को दिगम्बर जैन इंटर कालेज में आश्रित कोटे में नियुक्ति पर छह सप्ताह में प्रबंधन कमेटी को निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने दिगम्बर जैन इंटर कालेज बरौत बागपत की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने मृतक आश्रित प्रतीक जैन की याचिका मंजूर कर ली है। प्रबंध समिति ने जिला विद्यालय निरीक्षक के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके द्वारा प्रबंध समिति को अध्यापक के आश्रित को नियुक्त करने का आदेश दिया गया था।


याची अल्पसंख्यक कालेज का कहना था कि डीआईओएस का आदेश संविधान के अनुच्छेद 29 एवं 30 (1) के तहत अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान खोलने एवं उसके प्रबंधन के मूल अधिकार के विपरीत है। कोर्ट ने कहा कि निःसंदेह अल्पसंख्यकों को कालेज प्रबंधन का अधिकार प्राप्त है, किन्तु राजकीय सहायता ले रहे कालेजों पर रेग्यूलेशन के कुछ उपबंध लागू होंगे। जिसमें मृतक आश्रित की नियुक्ति भी शामिल है। आश्रित की नियुक्ति के लिए आदेश देना प्रबंधकीय अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं माना जा सकता। रेग्यूलेशन 103 कर्मचारी के आश्रित को नियुक्ति पाने का अधिकार देता है। याची प्रतीक जैन ने मृतक आश्रित कोटे के तहत सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की मांग की थी।

ईसीसी का खाता सीज करने का आदेश वापस, नगर निगम से जानकारी तलब

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ईविंग क्रिश्चियन कालेज गऊघाट इलाहाबाद से नगर निगम की सम्पत्ति कर वसूली आदेश के मामले में कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर मुख्य टैक्स निर्धारण अधिकारी पी.के मिश्रा से जानकारी मांगी है और याचिका की सुनवाई हेतु 15 नवम्बर को पेश करने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने ईविंग क्रिश्यिन कालेज के प्राचार्य की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सुभाष घोष ने बहस की। मालूम हो कि नगर निगम ने कालेज को सम्पत्ति कर जमा करने का आदेश दिया। जमा न करने पर कालेज का खाता सीज कर दिया। याची का कहना था कि धारा 285 के तहत केन्द्रीय विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कालेज से सम्पत्ति कर नहीं लिया जा सकता। इस पर कोर्ट ने नगर निगम को जब्त खाता मुक्त करने तथा सम्पत्ति कर पर चार हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया था। खाता जब्ती आदेश वापस ले लिया किन्तु सम्पत्ति कर लगाने के प्रकरण पर निर्णय नहीं लिया। जिस पर यह अवमानना याचिका दाखिल की गयी है।