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High Court का महत्वपूर्ण फैसला, प्यार में बना संबंध रेप नहीं

Allahabad High Court: कोर्ट ने माना है कि पीड़ित युवती दुष्कर्म का जो समय बता रही है, उस समय बालिग थी। खुद अपनी मर्जी से आरोपी युवक के साथ शारीरिक संबंध बनाया था। ऐसे में इस तरह के संबंध को किसी भी दृष्टि से दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता है।

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Allahabad high court

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Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि प्रेम में शारीरिक संबंध बने हैं तो इसे रेप नहीं कहा जा सकता। यह फैसला कोर्ट ने एक युवती की शिकायत पर दिया है। युवती का आरोप है कि प्रेमी ने शादी का झांसा देकर रेप किया और बाद में शादी से इनकार कर दिया। मामला संत कबीर नगर का है।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने माना है कि पीड़ित युवती दुष्कर्म का जो समय बता रही है, उस समय बालिग थी। खुद अपनी मर्जी से आरोपी युवक के साथ शारीरिक संबंध बनाया था। ऐसे में इस तरह के संबंध को किसी भी दृष्टि से दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने युवती की अर्जी को रद कर दिया है।

2008 में हुई थी मुलाकात

कोर्ट ने आरोपी जियाउल्ला की अर्जी को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है। यह अर्जी निचली अदालत में दाखिल आरोप पत्र को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। केस डायरी के अनुसार, पीड़ित युवती संत कबीर नगर की है। वह 2008 में अपनी बहन की शादी के लिए गोरखपुर गई थी। वहां पर आरोपी से उसकी मुलाकात हुई थी।

ऐसे किया शादी से किया इनकार

फिर दोनों में प्यार हुआ और आरोपी ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। पीड़ित युवती ने अपने बयान में कहा था कि कुछ दिन बाद आरोपी के घर वाले उसे व्यापार के लिए सउदी भेज दिए। जब वह वापस लौटा तो शादी करने से इनकार कर दिया।

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