मामले में याचिकाकर्ता ने यह जानकारी दी है कि वह तृतीय श्रेणी का सरकारी कर्मचारी है। प्रतिवादियों ने ग्रेच्युटी की पूरी राशि का भुगतान करना स्वीकार किया है। साथ ही मई 2021 के महीने में 19,200 रुपये का भुगतान भी किया। याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, तब से शेष राशि रु.3.06 लाख और उस पर अर्जित वैधानिक ब्याज अभी भी बकाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रतिवादी चार महीने की अवधि के भीतर याचिकाकर्ताओं की बकाया ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।