
इलाहबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस उपनिरीक्षक पद पर चयनित विजय सिंह यादव को अपराधिक केस लंबित रहने के आधार पर नियुक्ति न करने के मामले में दो माह के भीतर अवतार सिंह केस के फैसले के तहत विचार कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। अवतार सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि तथ्य छिपाने का आरोप है तो आरोप स्पष्ट होना चाहिए और सफाई का मौका देना चाहिए। यदि आपराधिक मामले में अभ्यर्थी बरी हो गया हो तो यह देखना चाहिए कि संदेह का लाभ मिला है या साफ बरी हुआ है। इन मसलों पर विचार किये बगैर चयनित व्यक्ति को नियुक्ति देने से इंकार करना सही नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने फर्रूखाबाद के विजय सिंह यादव केस के अधिवक्ता कैलाश प्रकाश पाण्डेय को सुनकर दिया है। याची का कहना है कि 2015 की पुलिस भर्ती में वह उपनिरीक्षक पद पर चयनित हुआ किन्तु उसे नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। बतायचा गया कि उसके खिलाफ कायमगंज, फर्रूखाबाद में दो आपराधिक मामले लंबित है। याची का कहना है कि वह दोनों आपराधिक मामलों में बरी हो चुका है। इसलिए उसने फार्म भरते समय जानकारी नहीं दी। याची का कहना था कि अवतार सिंह केस के फैसले के तहत याची के आपराधिक मामले में बरी होने के कारण नियुक्ति पाने का प्रशिक्षण पर भेजे जाने का अधिकार है। कोर्ट ने याची को दो हफ्ते में पुलिस भर्तीै बोर्ड को प्रत्यावेदन देने को कहा है और बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दो माह में विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
By Court Correspondence
Published on:
23 Jan 2019 10:38 pm
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