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महिला ग्राम से कालिन्दीपुरम् एलिवेटेड फ्लाईओवर पर सभी विभाग सहमत

कोर्ट ने कहा कि रेलवे, वायु सेना व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने महिला ग्राम इंटर कॉलेज से कालिन्दीपुरम् तक एलीवेटेड फ्लाई ओवर बनाने के प्रस्ताव पर सहमति भी दी है।

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Bamrauli airport

बमरौली एयरपोर्ट

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बमरौली एयरपोर्ट टर्मिनल मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शासन की लम्बी दूरी की योजना पर आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि टर्मिनल तक प्रस्तावित मार्ग से पहुंचने में 52 मिनट लग सकते हैं, जबकि कोर्ट द्वारा सुझाये गये फ्लाई ओवर एलिवेटेड मार्ग से हाईकोर्ट से मात्र 20 मिनट में टर्मिनल पहुंचा जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि रेलवे, वायु सेना व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने महिला ग्राम इंटर कालेज से कालिन्दीपुरम् तक एलीवेटेड फ्लाई ओवर बनाने के प्रस्ताव पर सहमति भी दी है। दो किमी. लम्बे फ्लाई ओवर से कम दूरी तय कर आसानी से टर्मिनल पहुंचा जा सकता है। जो कालिन्दीपुरम् होते हुए झलवा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस मार्ग पर किसी विभाग ने आपत्ति नहीं की है। कोर्ट ने रक्षा विभाग व रेलवे से इस योजना पर अनापत्ति देने को कहा है ताकि यथाशीघ्र इस पर अमल किया जा सके। मामले की सुनवाई 18 सितम्बर को होगी।


इस मामले की जनहित याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवन्त वर्मा की खण्डपीठ कर रही है। कोर्ट ने बेगम बाजार फ्लाई ओवर पर यह कहते हुए हस्तक्षेप नहीं किया कि कोर्ट विशेषज्ञ नहीं है। इस संबंध में सभी अधिकारी बैठकर निर्णय ले सकते हैं।

बेगम बाजार फ्लाईओवर निर्माण भी हाईकोर्ट में उठा
बेगम बाजार फ्लाईओवर पर वायुसेना की आपत्ति पर बमरौली एयरपोर्ट टर्मिनल मामले की सुनवाई कर रही इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने फिलहाल हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा कि फ्लाईओवर का प्रकरण कोर्ट के पास नहीं है। मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ के समक्ष वायुसेना के अधिकारियों ने कोर्ट को पूरी योजना की लैपटाप पर जानकारी दी। अपर सालीसीटर जनरल शशिप्रकाश सिंह ने भी कोर्ट का ध्यान इस समस्या की तरफ खींचा और कहा कि फ्लाईओवर बनने से प्लेन की उड़ान में बाधा आयेगी।

कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता से पूछा कि बिना अनापत्ति के किसकी अनुमति से फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। सरकार यहां अण्डरपास बना सकती थी। राज्य सेतु निगम व रेलवे फ्लाईओवर बना रही है। 85 फीसदी बन चुका है। वायुसेना ने निर्माण रोक दिया है। सवाल यह भी उठा कि सेना ने पहले क्यों नहीं रोका। तथ्य यह भी है कि जहां फ्लाईओवर बन रहा है आसपास बहुमंजिला इमारते हैं। वायुसेना की आपत्ति स्वयं सवालों के घेरे में है। फिलहाल कोर्ट ने समस्या का हल ढूंढने को कहा है।

BY- Court Corrospondence