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मथुरा दम्पत्ति हत्या मामला: घर में रहेंगे नाबालिग बच्चे, वात्सल्य संस्था करेगी देखभाल

मथुरा के दम्पत्ति हत्या व लूटपाट मामले में हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चों को अपने ही घर में रहने को कहा।

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Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद. मथुरा में दम्पत्ति की हत्या और लूटपाट की घटना के बाद अनाथ हुए दो नाबालिग बच्चे फिलहाल अपने ही घर में रहेंगे। मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले ने दोनों बच्चों को अपने घर में बुलाकर उनसे व्यक्तिगत रूप से बात की। बच्चों ने अपने घर में ही अपनी दादी (80) के साथ रहने की इच्छा जताई है।

संस्था वात्सल्य ग्राम ने बच्चों की देखभाल करने का जिम्मा उठाया है। संस्था ने कहा है कि वह बच्चों के पढ़ाई का खर्च उठायेगी और सभी प्रकार की आवश्यक मदद देगी। कोर्ट ने कहा है कि संस्था के अधिकारी नियमित रूप से बच्चों से मुलाकात कर उनकी आवश्यकताएं जानते रहें। मथुरा के मधुमंगल दास शुक्ल की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले और न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता की पीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट को बताया गया कि दिवंगत दम्पत्ति के दोनों बच्चों में बेटा इस बार इण्टर और बेटी हाईस्कूल की परीक्षा दे रहे हैं। दोनों अपने घर में ही रहना चाहते हैं। उनके साथ उनकी दादी और चचेरी बहन भी रहेगी। मामले के जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि एक संदिग्ध का नारको टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है। जांच सही दिशा में चल रही है और जल्दी ही केस का खुलासा हो जायेगा। कोर्ट ने पांच मई को सुनवाई हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार मामले में लेखपालों की गिरफ्तारी पर रोक

हाईकोर्ट इलाहाबाद ने मेरठ के रविदत्त शर्मा, गुरूदेव सिंह, रघुवंश शर्मा व दो अन्य लेखपालों की धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज प्राथमिकी में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। लेखपालों की गिरफ्तारी पर रोेक पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक रहेगी। आरोपियों को विवेचना में सहयोग देने का कोर्ट ने निर्देश दिया है साथ ही कोर्ट ने दिल्ली गेट थाने में दर्ज इस मामले की विवेचना तीन माह में पूरी करने का भी निर्देश दिया हैै। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति ए.सी.शर्मा की खण्डपीठ ने रविदत्त शर्मा व कई अन्य लेखपालों की याचिका पर दिया है। लेखपालों का कहना था कि उन पर मनगढंत व निराधार आरोप लगाये गये हैं। याचियों को परेशान करने की नियत से प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। इसे रद्द किया जाए।

By Court Correspondence