
2004 के बीटीसी प्रशिक्षु सहायक अध्यापकों को मिलेगा स्टाइपेंड
इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद ने बेसिक शिक्षा सचिव उ.प्र को 2004 में बीटीसी प्रशिक्षित सहायक अध्यापकों को 2500 रू. प्रतिमाह स्टाइपेंड देने के लिए सभी बीएसए को परिपत्र जारी कर भुगतान कराने का निर्देश दिया है और महानिबंधक के समक्ष दो माह में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पी के एस बघेल ने प्रेम नारायण चैरसिया व 315 अन्य सहायक अध्यपकों की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचीगण 28 दिसम्बर 2005 को बीटीसी प्रशिक्षण लेने के बाद सहायक अध्यापक नियुक्त हुए, 14 जनवरी 2004 के शासनादेश के तहत अन्य अध्यापकों के समान वेतन पाने के हक को लेकर याचिका दाखिल की। कोर्ट ने राज्य सरकार को वेतन वृद्धि देने का आदेश दिया।
सरकार ने हाई कोर्ट में विशेष अपील व सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की, जो ख़ारिज हो गयीं। वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा परिषद ने आदेश पालन का आदेश भी जारी किया। जिसके बावजूद पालन नही किया गया तो यह याचिका दाखिल हुई। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों की ऐसी ही अकर्मण्यता के चलते हाईकोर्ट में याचिकाओं का आवश्यक बोझ बढ़ रहा है। जब कि कोर्ट पर पहले से ही मुकदमों की भारी संख्या से जूझ रहा है।
इंटर कालेजों के पद प्रति नियुक्ति से भरने पर रोक
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंटरमीडिएट कालेजों के रिक्त पदों पर रिटायर्ड शिक्षकों और बेसिक स्कूलों के अध्यापकों के प्रतिनियुक्ति से भरे जाने पर रोक लगा दी है। इन पदों को अस्थायी रूप से कुछ समय के लिए प्रति नियुक्ति से भरने की योजना थी। राहुल सिंह और प्रभाकर चैहान की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पी.के.एस.बघेल ने अधिवक्ता को सुनकर दिया है।
याचीगण का कहना था कि राजकीय इंटर कालेज में 9342 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी हुआ। याचीगण ने आवेदन किया था। लिखित परीक्षा का परिणाम जारी नहीं किया गया। इस बीच नियमावली में संशोधन कर निर्णय किया कि पदों को लोक सेवा आयोग द्वारा लिखित परीक्षा से भरा जायेगा। इस दौरान रिक्त पदों पर रिटायर्ड शिक्षकों और बेसिक स्कूलों के अध्यापकों से भरा जायेगा। कोर्ट ने इससे संबंधित शासनादेश पर रोक लगाते हुए पक्षकारों से जवाब मांगा है।
by PRASOON PANDEY
Published on:
19 Sept 2017 10:51 pm
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