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इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कर्मचारी चयन आयोग की 2011 की पैरा मिलिट्री फोर्स भर्ती में अनियमितता को लेकर दाखिल सैकड़ों याचिकाएं यह कहते हुए निस्तारित कर दिया है कि जिन अभ्यर्थियों ने अपनी श्रेणी में कट आॅफ मार्क से अधिक अंक अर्जित किये हैं, वे चार हफ्ते के भीतर आयोग को अपना प्रत्यावेदन दे और आयोग मेडिकल जांच में फिट पाये जाने पर तीन माह के भीतर नियुक्ति पर विचार करे। कोर्ट ने ऐसे अभ्यर्थियों जिन्होंने राज्य कोड, बार्डर कोड, नक्सल कोड, टाई कोड आदि में छेड़छाड़ कर गलत तरीके से नियुक्ति प्राप्त कर ली है, ऐसे मामलों में सुनवाई का मौका देते हुए साक्ष्यों पर विचार कर आयोग नियमानुसार कार्यवाही करे।
कोर्ट ने कहा है कि 28 नवम्बर 2011 को जारी कट आॅफ मार्क से अधिक अंक पाने वाले मेडिकल जांच में सफल अभ्यर्थी यदि आयोग को सम्पर्क करते हैं तो आयोग चार हफ्ते में जांच कर चार हफ्ते में ऐसे लोगों के दावे पर विचार कर निर्णय ले। कोर्ट ने ऐसे लोगों को अनुतोष देने से इन्कार कर दिया है, जिन्होंने कट आॅफ मार्क से कम अंक प्राप्त किये हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने अजीत सिंह व 54 अन्य सहित 500 से अधिक याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिकाओं पर अधिवक्ता विजय गौतम व भारत सरकार के अपर सालीसिटर जनरल शशि प्रकाश व सहायक सालीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश सहित सैकड़ों वकीलों को सुनकर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
आयोग ने 2011 में पैरा मिलिट्री फोर्स के कांस्टेबलों की भर्ती शुरू की। परिणाम घोषित होने के बाद अनियमितता को लेकर याचिकाएं दाखिल हुई। कोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। सोमवार को फैसला सुनाया गया। इस फैसले से जहां तमाम लोगों को राहत मिली है तो सैकड़ों को मायूसी। साथ ही घपले कर नियुक्त हुए लोगों पर गाज भी गिर सकती है।
By Court Correspondence
Published on:
21 Aug 2018 08:49 am
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