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इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों में गड़बड़ियों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यूपी में सहकारी समितियों के चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी हो चुकी है एवं मतदाता सूची तैयार हो चुकी है। ऐसे में क्षेत्रों का परिसीमन या आरक्षण आदि में हुई गड़बड़ियों पर कोई आदेश देने का औचित्य नहीं है।
मैनपुरी के फूलचंद्र की याचिका पर सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया कि चुनाव सही तरीके से नहीं हो रहा है। ग्राम सभाओं के परिसीमन और नियमावली 1968 के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से एडिशनल सीएससी रामानन्द पाण्डेय का कहना था कि 1968 की नियमावली के नियम 444 सी में व्यवस्था है कि यदि चुनाव कराने में किसी नियम का उल्लंघन हुआ हो तो व्यथित पक्ष एक्ट की धारा 70 के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है।
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उस पर जिलाधिकारी को सुनवाई का अधिकार है। चुनाव प्रक्रिया आयोग की निगरानी में 06 नवम्बर 17 को जारी अधिसूचना के क्रम में शुरू हो चुकी है। ऐसे में याचिका में हस्तक्षेप से चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
by Prasoon Pandey
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Updated on:
03 Jan 2018 11:25 pm
Published on:
03 Jan 2018 10:57 pm
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