इलाहाबाद. हाई कोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले में राज्य सरकार को वाराणसी, इलाहाबाद व कानपुर की सीवेेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति पर हलफनामा मांगा है और पूछा है कि कितने नाले गंगा में सीधे गिर रहे हैं तथा कितने पानी के शोधन की व्यवस्था है।
कोर्ट ने एसटीपी को कार्यरत रखने का भी निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने गंगा प्रदूषण को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। न्यायमित्र अरूण गुप्ता ने बताया कि इलाहाबाद में बनी सीवर लाइन घरों से नहीं जोड़ी गयी है और गैर शोधित पानी सीधे गंगा में जा रही है। राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय व स्थायी अधिवक्ता रामानंद पाण्डेय ने उचित कार्यवाही हलफनामा दाखिल करने का आश्वासन दिया।
याची अधिवक्ता विजय चन्द्र श्रीवास्तव ने गंगा में सीधे गिर रहे चौदह नालों का फोटोग्राफ का हलफनामा दाखिल कर कहा कि एसटीपी अक्सर बंद रहती है जिसके चलते गंगा प्रदूषित हो रही है। एसटीपी से सीधे गंगा में गिर रहे गंदे पानी के फोटोग्राफ पर कोर्ट ने नाराजगी प्रकट की। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता डा.हरिनाथ त्रिपाठी से भी रिपोर्ट मांगी है तथा नालों को टैप करने का निर्देश दिया है।