
इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज. वाराणसी में सीवर लाइन में जहरीली गैस के कारण हुई दो सफाई कर्मचारियों की दर्दनाक मौत पर मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर) की जनहित याचिका पर दो महीने बाद भी प्रति शपथ पत्र न दाखिल करने को कोर्ट ने गम्भीरता से लिया है और दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। सुनवाई 17 मई को होगी। कोर्ट ने कहा है कि यदि जवाब दाखिल नहीं होता तो महाप्रबंधक जल निगम वाराणसी व परियोजना प्रबन्धक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी को पत्रावली के साथ तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पी.के.एस. बघेल और न्यायमूर्ति आर.आर. अग्रवाल की खंडपीठ ने पीपुल्स विजिलेंस कमेटी फार ह्यूमन राइट की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका प्राधिवक्ता चार्ली प्रकाश, के.के. राय व राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बहस की। मालूम हो कि दो मार्च 19 को वाराणसी के पांडेयपुर में सीवर लाइन में काम कर रहे दो सफाई कर्मचारियों की मौत जहरीली गैस से दम घुटने से हुई थी। सीवर लाइन का ठेका एल एंड टी कम्पनी को है। उसने एक स्थानीय ठीकेदार से यह काम कराया। जिसे इस काम का कोई अनुभव नही था।
इसके अलावा मैन्युअल सकैवेनजिंग एक्ट 2013 के प्राविधानों के अनुरूप किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरण, आक्सीजन मास्क, दस्ताना, टार्च, हेलमेट आदि नहीं दिए गए थे। मजदूरों की मौत के बाद ठीकेदार, अभियंता भाग खड़े हुए। कोर्ट ने याचिका पर सरकार व अन्य विपक्षियों से जवाब मांगा था। समय बीत जाने के बाद भी जवाब दाखिल न करने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कहा जवाब दाखिल नहीं होता तो विपक्षी अधिकारी कोर्ट में पेश हो। सुनवाई 17 मई को होगी।
BY- Court Corrospondence
Published on:
06 May 2019 10:41 pm
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