4 जून 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेहद सख्त टिप्पणी: ‘कमजोर फॉरेंसिक जांच के कारण मजबूरी में देनी पड़ रही है आरोपियों को जमानत’

Allahabad High Court News : यूपी की फॉरेंसिक व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेहद सख्त टिप्पणी। डीएनए जांच की खराब तकनीक के चलते रेप-मर्डर के आरोपी को मिली जमानत; कोर्ट ने कहा- मजबूरी में दे रहे हैं जमानत।

2 min read
Google source verification
Allahabad Highcourt

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, PC- Patrika

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि राज्य की फॉरेंसिक लैब (FSL) में सुविधाओं की भारी कमी के कारण रेप और हत्या जैसे गंभीर अपराधों की जांच प्रभावित हो रही है। इससे कई मामलों में सही न्याय नहीं मिल पा रहा है।

एटा जिले में नवंबर 2025 का एक संवेदनशील मामला हाईकोर्ट के सामने आया। एक महिला के साथ कथित तौर पर रेप किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। महिला का शव नदी के किनारे मिला था। पुलिस ने एक युवक को आरोपी बनाया, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने जमानत देते हुए कहा, 'अदालत भारी मन से और मजबूरी में आरोपी को जमानत दे रही है।' मुख्य कारण यह था कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में आरोपी का डीएनए पीड़िता के शरीर से लिए गए नमूनों (वजाइनल स्वैब) से मैच नहीं कर पाया। डीएनए प्रोफाइल अधूरा और कमजोर था, जिससे आरोपी को अपराध से सीधे जोड़ा नहीं जा सका।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे कई मामले अदालत के सामने आ चुके हैं, जहां रेप-मर्डर के आरोप में डीएनए जांच रिपोर्ट कमजोर होने के कारण आरोपी को जमानत मिल जाती है। कोर्ट ने बताया कि कई बार नमूने जांच के लिए भेजे जाते हैं, लेकिन फॉरेंसिक लैब में आधुनिक उपकरण न होने और स्टाफ की कमी के कारण पूरा डीएनए प्रोफाइल तैयार नहीं हो पाता।

मॉडर्न बनें फॉरेंसिक लैब

न्यायमूर्ति देशवाल ने कहा कि फॉरेंसिक साक्ष्य आपराधिक न्याय व्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगर ये कमजोर होंगे तो गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाना मुश्किल हो जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार की जिम्मेदारी याद दिलाई कि उसे फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाना चाहिए। पुरानी मशीनें, कर्मचारियों की कमी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा न्याय प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है।

कोर्ट ने एक पुराने मामले का भी हवाला दिया, जिसमें यूपी एफएसएल के निदेशक ने खुद स्वीकार किया था कि राज्य की कई लैब्स में आधुनिक डीएनए जांच उपकरण नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि इस फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजी जाए, ताकि इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में लाया जा सके।

जानें क्या बोला बचाव पक्ष

बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का नाम शुरू में एफआईआर में नहीं था। बाद में गवाहों के बयान के आधार पर उसे शामिल किया गया। आरोपी नवंबर 2025 से जेल में था और उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत केवल इस सुनवाई तक सीमित है और मुकदमे के अंतिम फैसले पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग