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हाईकोर्ट ने कहा -सब्सिडी छोड़िए सरकार, गांव में गरीबों के लिए खोलें सस्ता भोजनालय

हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड की बदहाल स्थिति पर की तल्ख टिप्पणी, राज्य सरकार से मांगा जवाब

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इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद. अपने तल्ख फैसलों के लिए जाना जाने वाला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गरीबों के खाद्यान के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने कहा है कि सब्सिडी छोड़िए अब गरीबों के लिए गांव स्तर पर भोजनालय की बात करिए।


इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है और कहा है कि अगर , हलफनामा नहीं दायर होता है तो मुख्य सचिव खुद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। दरअसल, उच्च न्यायालय ने दशकों से सूखे के चलते भुखमरी से पीड़ित बुन्देलखंड के गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को सस्ते दर पर अनाज के बजाय कम दर पर पका भोजन उपलब्ध कराने की योजना लागू करने पर मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और कहा है कि यह हलफनामा दाखिल नहीं होता तो वह 5 मार्च को हाजिर हों।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की खण्डपीठ ने बुन्देलखण्ड उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार ने लखनऊ में 5 व 10 रूपये में भरपेट भोजन की कैंटीन खोली है। संसद व विधानसभा में सांसदों, विधायकों व सचिवालय अधिकारियों के लिए सस्ती दर की कैंटीन है। कोर्ट ने कहा कि गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने में भारी सब्सिडी सरकार दे रही है। यदि सब्सिडी बंद कर इसी को पका भोजन ग्राम पंचायत स्तर पर व फिर प्रत्येक गांव में उपलब्ध कराने की कोशिश करें ताकि बुन्देलखंड के गरीबों की भूख से मौत न हो सके।

जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा
-69 हजार वर्गमीटर बुन्देलखंड एरिया में 40.5 मिलियन आबादी है। सात जिलों की 70 फीसदी आबादी 4500 गांवों में निवास करती है। सूखे से पीड़ित एरिया के विकास के लिए सरकारों ने भारी अनुदान दिया है। बालू, पत्थर, ग्रेनाइट से धनी क्षेत्र की जनता को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। खनन माफिया अधिकारियों की मिलीभगत से भूगर्भ सम्पत्तियों का दोहन किया जा रहा है।
-चम्बल कुंवारी, पहुज, सिन्ध, बेतवा आदि नदिया होने के बावजूद पीने व सिंचाई के पानी की भारी कमी है। आदमी ही नहीं जानवरों का जीवन मुश्किल हो गया है। कोर्ट ने कहा कि लोगों को एक, दो व पांच रूपये में भोजन की व्यवस्था की जाय ताकि लोग भूख से न मरने पाए।