19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नए रंग में इलाहाबाद विवि की सियासी जंग

चुनावी जमीन तैयार कर रही हैं ऋचा सिंह सपा से मिल सकता है शहर उत्तर विधानसभा से टिकट

3 min read
Google source verification

image

Sarweshwari Mishra

Jul 03, 2016

Richa Singh

Richa Singh

इलाहाबाद. इविवि पिछले में कुछ महीनों से गरमाई सियासत इस बार नए रंग में दिख रही है। जिसे छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह एक नया रूप दे रहीं हैं। पांच दिनों से चल रही छात्रसंघ बनाम विश्वविद्यालय की लड़ाई का कलेवर अब कुछ बदला बदला सा नजर आ रहा है।

इसके कई सियासी मायने हैं। 90 साल में पहली बार कोई छात्रा छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर विश्वविद्यालय के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने वाली ऋचा ने पिछले एक साल में कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से लड़ाई लड़ी। छात्रसंघ भवन से शुरू हुई इसकी लड़ाई संसद भवन तक पहुंची।

लेकिन इस छात्रहित की लड़ाई का सीधा फायदा ऋचा के राजनितिक कैरियर को मिला। वामपंथी विचारधारा वाली ऋचा को छात्रसंघ चुनाव के दौरान समाजवादी छात्रसभा का समर्थन मिला और अध्यक्ष जैसे पद पर बड़ी जीत मिली।

चुनाव के दौरान महिला प्रत्यासी होने के नाते ऋचा सुर्खियों में रही। और चुनाव के बाद आंदोलनों से सबकी जुबान पर छाई रहीं। बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को रद्द कराना ऋचा की बड़ी जीत रही है। जिसका सियासी इनाम प्रदेश सरकार द्वारा वीरांगना लक्ष्मी बाई पुरस्कार के रूप में मिला और फिर सपा के दिग्गज शिवपाल यादव की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन कर ऋचा ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सबके सामने रख दिया।

पिछले दिनों ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन परीक्षा का ऑप्सन दिलाने के लिए आंदोलन में फिर उनके सर जीत का सेहरा बंधा और विवि प्रशसन को कदम पीछे खीचने पड़े। विवि की प्रवेश परीक्षा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष को हटाने के लिए लगातार जंग चल ही रही यही थी कि अचानक प्रवेश परीक्षा में धांधली जंग का हथियार बन गई है और उससे कुलपति समेत कई दिग्गज निशाने पर आ गए।

कैम्पस से जोड़ रहीं शहर

छात्रसंघ अध्यक्ष इस बार परीक्षाओ की अनियमितता को इलाहाबाद के लोगो को जोड़ रही हैं। जिससे वो एक ही तीर से कई निशाने करने जा रही हैं।

ऋचा ने आंदोलन को धार देने के लिए कुलपति द्वारा तय किये गए 4 जुलाई का दिन चुना है। उस दिनकुलपति 5 छात्रों से मिलेंगे, जिनसे पीजीएटी की अनियमिताओं की जानकारी लेंगे पर वो छात्र नेताओं से नही मिलंगे। इसके विरोध में ऋचा पुरे शहर में माइक मीटिंग कर छात्रों के आलावा अभिभावाको को कैम्पस में इकठ्ठा करने की कोशिश कर रही हैं। उन अभिभावको पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है जिनके बच्चे यहां के बजाए बाहर पढ़ने जा रहे हैं। ऋचा यह बता रही है की विवि के शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है क्योंकि विवि प्रशासन कैम्पस के शैक्षिक माहौल को नहीं बरकरार रख पा रहा है। अपराधिक छवि वाले छात्रों का संरक्षण दिया जा रहा है इससे यहाँ के लोग अपने बच्चों को बाहर भेज रहे हैं।

चुनावी समर की जमीन कर रहीं तैयार

आपको बता दे की सपा जॉइन करने के बाद से की यह चर्चा है की ऋचा को इलाहाबाद के शहर उत्तरी से पार्टी उतार सकती है। विवि भी उत्तरी विधान सभा के अन्तर्गत आता है और ऋचा इसी क्षेत्र की रहने वाली हैं। इस सीट से लगातार दो बार इविवि के पूर्व अध्यक्ष अनुग्रह नारायण सिंह विधयाक हैं। अनुग्रह ने पहली बार इविवि के पूर्व प्रोफेसर नरेंद्र सिंह गौर को हराया जो 3 बार यहां से विधयाक रहे। वहीं दूसरी बार बीजेपी के बाहुबली नेता उदयभान करवरिया को अनुग्रह के सामने हार का सामना करना पड़ा।

सपा को भी इस सीट पर साफसुथरी छवि वाले प्रत्यासी की तलाश थी जो विवि और विधान सभा के गठजोड़ पर मजबूत रहे। ऋचा ने सियासी फायदे को देखते हुए माइक मीटिंग के जरिये मुल्लहलो में पहचान बना घर घर पहुंच रही हैं। ऋचा भले इसे कैम्पस की लड़ाई कहें लेकिन हकीकत यह है की इसके बहाने वो अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रही हैं।

ये भी पढ़ें

image