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इलाहाबाद युनिवर्सिटी के कुलपति की बड़ी कार्यवाही, कुलसचिव से छीने सारे अधिकार, मचा हड़कम्प

कुलपति के निर्णय को ऑक्टा का समर्थन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने खोला वीसी के खिलाफ मोर्चा।

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Allahabad University

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद. इलाहाबाद विश्वविद्यालय कुलपति रतन लाल हांगलू बनाम कुलसचिव की लड़ाई जमीनी सतह पर आ गई है। कुलपति रतनलाल पर लगे आरोपों की जांच जारी है। इसी बीच जांच कमेटी के दस्तावेज के कुछ अंश लीक हो गए है। जानकारी के मुताबिक जो जांच रिपोर्ट लीक हुई है, उसमें कुलपति रतनलाल हांगलू पर तमाम आरोप लगे हैं, जिसमें, विश्वविद्यालय के बिगड़ते माहौल को जिम्मेदार वीसी को बताया गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के लीक होने के बाद से ही कुलपति और कुलसचिव के बीच तनाव की खबरें आ रही थीं। बीते दिनों कुलसचिव ने खुद को असुरक्षित बताते हुए जिले के अधिकारियों से शिकायत की थी। जिसके बाद कुलपति द्वारा कुलसचिव कर्नल की सुरक्षा बढ़ा दी गई, लेकिन कर्नल ने सुरक्षा वापस कर दी थी। कुलपति बनाम कुल सचिव के विवाद में नया मोड़ तब आया जब कुलपति ने कर्नल कुलसचिव से सभी अधिकार वापस ले लिए।


इविवि के जनसंपर्क अधिकारी ने यह सूचना दी की कुलपति ने कुलसचिव के कर्तव्य निर्वहन के लिए प्रदत्त अधिकारों को वापस लेकर परीक्षा नियंत्रक एच एस उपाध्याय को देकर उन्हें दायित्वों के निर्वहन का आदेश दिया है। विवि के जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के परिनियम, अधिनियम एवं आर्डीनेंस में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए कर्नल हितेश लव से कुलसचिव के कर्तव्य निर्वहन के लिये प्रदत्त अधिकारों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। अंतरिम रूप से परीक्षा नियंत्रक को कुलसचिव के दायित्व के निर्वहन का आदेश दिया है।


गौरतलब है कि ऑक्टा के पदाधिकारियों ने बैठक कर इविवि के कार्यों में आ रही रूकावटों का कारण कुलसचिव को माना था। बैठक में कहा गया था, कि कुलपति के सारे कार्य कुलसचिव के माध्यम से किये जाते हैं, लेकिन दोनों में सामंजस्य न होने के कारण इविवि का माहौल खराब है।


बता दें कि कुलपति के निर्णय के बाद तत्काल ऑक्टा के पदाधिकारियों ने बैठक कर कुलपति के इस कदम की सराहना की। तो वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कुलपति के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री रोहित मिश्रा ने कुलपति के निर्णय को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है। कुलपति विश्वविद्यालय में अराजकता को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार करने की मंशा से कुलसचिव के खिलाफ कार्यवाही की कुलपति की मनमानी में कुलसचिव रोड़ा बन रहे थे। जिसके चलते कुलपति ने यह कार्यवाही की है।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कुलसचिव कर्नल के साथ खड़ा है और कुलपति के मनमानी के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहेगा।
By Prasoon Pandey