
allahabad
प्रयागराज। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी अपना सात दशक पुराना घरेलू रिश्ता प्रयागराज से तोड़ रहे है। जानकारी के मुताबिक डॉ जोशी पुराने अपने बंगले को बेचने की तैयारी में है। यह बंगला सिर्फ उनका आवास ही नहीं बल्कि कई बड़े राजनीतिक फैसले का गवाह भी रहा है। डॉ जोशी के करीबियों को माने उनके बंगले को बेचने के लिए अंतिम दौर में बात चीत चल रही है।
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डाॅ जोशी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शिक्षक और फिर यहाँ के सांसद हुए डॉ जोशी अपने राजनितिक शीर्ष पर प्रयाग से पहुचें ।1996, 98, 99 में लगातार यहां से सांसद चुने गए लेकिन 2004 के आम चुनाव में मिली हार के बाद डॉ जोशी का यहां आना जाना कम हो गया। डॉ जोशी 1951में प्रयाग आए और यहीं अपनी कर्मभूमि बना ली। डॉ जोशी का बंगला जिसे अंगिरस के नाम से जाना जाता था । इस बंगले को डॉ जोशी ने अपने गुरु प्रो देवेन्द्र शर्मा के खाली करने पर प्रो शर्मा के सहयोग से एलाट कराया था।
1954 में प्रोफेसर शर्मा अवकाश प्राप्त होकर अपने घर कोलकाता वापस जाने लगे उस समय या बंगला सरकारी तौर पर प्रशासन ने प्रोफेसर शर्मा को एलाटथा लेकिन बाद में यह बंगला डॉ जोशी को एलाट कराकर उनके गुरु दे गए। 1960 में अपना शोध पूरा करने के बाद डॉ मुरली मनोहर जोशी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नियमित शिक्षक हो गए। बाद में सरकारी योजनाओं के तहत यह बंगला आवंटियों को बेचा जाने लगा तो डॉक्टर जोशी ने इसको खरीद लिया था। पुराने तरीके से बनाया मकान 1993 में डॉ जोशी ने इसे भव्य स्वरूप दिया और इसका नाममहर्षि अंगिरा के नाम पर डॉ जोशी ने इसका नाम अंगिरस रखा था।
डॉ जोशी का लंबा समय इस बंगले में बीता है। डॉ जोशी 2004 के बाद भले ही प्रयाग काम आए हो लेकिन हर किसी को इस बात का गुरूर था कि डॉ जोशी तक सबकी पहुंच बरकरार है। डॉ जोशी की दो बेटियां हैं प्रियंवदा और निवेदिता प्रियंवदा की शादी डॉ जोशी ने अपनी बेटी प्रियंवदा इलाहाबाद की शादी यही से की थी और उनकी शादी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई सम्मिलित होने के लिए यहां आए थे।डॉ जोशी भले ही 2004 के बाद यहाँ से सांसद न रहे हो लेकिन उनके चाहने वाले उन्हें ही अपना नेता मानते रहे।
Published on:
15 Jun 2019 11:32 am
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