इलाहाबाद.
संगम सिंहासनु सुठि सोहा, छत्रु अक्षय बटु मुनि मन मोहा।
चंवर जमुन अरु गंग तरंगा, देखि होंहिं दु:ख दारिद भंगा।।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीर्थराज प्रयाग का महात्म्य गाने वाले इस दोहे को मंच पर अंकित किया है। इससे ऐसा लग रहा है कि भाजपा आध्यात्मिक सोच के साथ राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक को अंजाम दे रही है। कहने को यह दोहा प्रयाग के महत्व को बताता है लेकिन इसके पीछे सियासी अर्थ भी छिपा है। गंगा और यमुना की तरंग रूपी चंवर से मिलने वाली शीतलता उस अक्षयवट को पाने की कल्पना को साकार करने का कदम है, जो देश को भाजपा युक्त और कांगे्रस मुक्त करने की दिशा में है।
इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पूर्व प्रधामनंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के गृह जिले में हो रही है, यहां से एक बार फिर भाजपा कांग्रेस मुक्त का नारा बुलंद करेगी। हालांकि उप्र में भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा खतरा सपा और बसपा से है। सियासी जानकारों का कहना है कि पहली प्रयाग में होने जा रहा भापजा का राष्ट्रीय जुटान उप्र को साधने के लिए ही है। भाजपा अपने पदाधिकारियों के जरिये कार्यकर्ताओं तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि देश के विकास के लिए कांग्रेस मुक्त होना जरूरी है। इस दोहे के जरिये यह संदेश देने की कोशिश है कि कार्यकर्ता को शीतलता तभी मिलगी, जब गंगा-जमुनी और सरस्वती का संगम होगा। यानी जनता में अक्षयवट रूपी राष्ट्रवादी विचारधारा स्थापित होगी। ऐसा करने से ही अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचेगा।