
allahabad high court
इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि इंटरमीडिएट एजूकेशन एक्ट की धारा 16 (ई) (11) के तहत आयोग से नियमित नियुक्ति होने तक प्रबंध समिति को 11 माह के लिए तदर्थ-अस्थायी तौर पर सहायक अध्यापक की नियुक्ति का अधिकार है। ऐसे नियुक्ति में तदर्थ अध्यापक को वेतन पाने का भी अधिकार है। किन्तु ऐसी निुयक्ति 11 माह से अधिक समय के लिए नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 11 माह के बीच नियमित नियुक्ति नहीं हो पाती तो प्रबंध समिति की संस्तुति पर 11 माह के लिए नियुक्त अध्यापक की अवधि का नवीनीकरण किया जा सकता है। कोर्ट ने डीआईओएस जौनपुर को निर्देश दिया है कि वह आदर्श इंटर कालेज इटाया जौनपुर में याची अध्यापक की नियुक्ति के अनुमोदन एवं वेतन भुगतान के संबंध में आदेश पारित करें।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने सुशील कुमार यादव एवं अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। मामले के अनुसार उक्त कालेज में विज्ञान एवं समाजशास्त्र के अध्यापकों की सेवानिवृत्ति के कारण दो पद खाली हुए। कालेज प्रबंध समिति ने नियमित नियुक्ति के लिए अधियाचना भेजा किन्तु बोर्ड से नियुक्ति न होने पर प्रबंध समिति ने विज्ञापन जारी कर नियुक्ति आवेदन मांगे। याची की नियुक्ति तदर्थ रूप में की गयी परन्तु वेतन भुगतान न होने पर याचिका दाखिल कर याची ने कहा कि प्रबंध समिति को खाली पद रहने की दशा में अस्थायी नियुक्ति का अधिकार है और ऐसे अध्यापक को वेतन पाने का भी अधिकार है।
फर्जी आदेश से लेवी की चीनी बेंचने पर मुख्य सचिव से हलफनामा तलब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के मुख्य सचिव से पूछा है कि जिला जज के फर्जी आदेश से त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इंड्रस्टियल कंपनी सहारनपुर के मालिकों द्वारा सरकारी लेवी की चीनी बाजार में बेंचने के मामले में राज्य सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार है या नहीं। कोर्ट ने मुख्य सचिव से 27 नवम्बर तक उनका इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
प्रमुख सचिव शुगर ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि चीनी पर केन्द्र सरकार का नियंत्रण होता है। फर्जी आदेश से चीनी बाजार में बेंचने के मामले में केन्द्र सरकार ही कार्रवाई कर सकती है। राज्य सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। यदि फर्जी आदेश पर कोई प्राथमिकी दर्ज होती है तो पुलिस कानून के तहत कार्यवाही करेगी।
इस हलफनामे को संतोषजनक न मानते हुए कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है। यह आदेश जस्टिस अरूण टंडन एवं जस्टिस राजीव जोशी की खंडपीठ ने रामपाल सिंह की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि कंपनी के मालिकों ने जिला जज का फर्जी आदेश तैयार कराया और करोड़ों की सरकारी लेवी की चीनी खुले बाजार में बेंच दी। कोर्ट ने कहा कि फर्जी आदेश का फायदा चीनी मिल मालिकों ने उठाया है।
Published on:
16 Nov 2017 11:23 am
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