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शंकराचार्य के धरना स्थल पर ‘कंप्यूटर बाबा’ का अनोखा विरोध, जमीन पर लेटकर साधु-संतों के सम्मान का मुद्दा उठाया

Prayagraj News: शंकराचार्य जी के धरना स्थल पर कंप्यूटर बाबा ने जमीन पर लेटकर अनोखा विरोध किया और भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर संतों के सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर आरोप लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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शंकराचार्य के धरना स्थल पर ‘कंप्यूटर बाबा’ का अनोखा विरोध | Image Source - X

Computer baba dharna in Prayagraj: शंकराचार्य जी के धरना स्थल पर उस वक्त माहौल और भी गरमा गया, जब प्रसिद्ध संत कंप्यूटर बाबा अचानक जमीन पर लेटकर धरने पर बैठ गए। उनका यह अनोखा विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया। बड़ी संख्या में मौजूद संतों और समर्थकों के बीच कंप्यूटर बाबा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात में साधु-संतों के सम्मान और अधिकारों की अनदेखी हो रही है। उनके इस कदम को संत समाज की एकजुटता और सरकार के प्रति असंतोष की खुली अभिव्यक्ति के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा सरकार पर सीधा आरोप

धरना देते हुए कंप्यूटर बाबा ने सीधे तौर पर भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन में संतों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा और कई मौकों पर उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, संत समाज केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का भी प्रतीक है और यदि उनकी आवाज को दबाया जाता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कंप्यूटर बाबा को जमीन पर लेटे हुए और अपने समर्थकों के बीच सरकार के खिलाफ बयान देते हुए देखा जा सकता है। यूजर्स इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, कुछ लोग इसे साहसिक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रहे हैं।

संत समाज की प्रतिक्रिया और समर्थन

धरना स्थल पर मौजूद अन्य संतों ने भी कंप्यूटर बाबा के बयान का समर्थन किया। उनका कहना है कि संतों को केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित न रखकर, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। कई संतों ने यह भी जोड़ा कि यदि सरकार उनके सम्मान और सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाती है, तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार के खिलाफ एक बड़ा संकेत बताते हुए संत समाज की नाराजगी का मुद्दा उठाया है। वहीं, भाजपा समर्थकों का कहना है कि सरकार संतों के सम्मान के लिए लगातार प्रयासरत है और इस तरह के प्रदर्शन को राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।