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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी: अमेरिकी पूर्व छात्रा द्वारा दी गयी करोड़ों की सम्पत्ति में घोटाले का आरोप

अमेरिका में रहने वाले पूर्व छात्र रंजीत टोपा ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को दान की थी 22,28,307.7 अमेरिकी डॉलर की सम्पत्ति। पूव प्रोफेसर यूनिवर्सिटी पर लगाया गबन का आरोप, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने एसएसपी को दी तहरीर, एफआईआर दर्ज करने की मांग।

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प्रयागराज. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी और विवादों का नाता टूटने का नाम नहीं ले रहा। दीक्षांत समारोह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब घोटाले और गबन के आरोपों तक जा पहुंचा है। विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के गबन का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल आया है, जिससे बाद दीक्षांत समारोह से पहले माहौल गर्म हो गया है। यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर राम किशोर शास्त्री ने आरोप लगाया है कि अमेरिका में रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र ने जो करोड़ों रुपये की सम्पत्ति यूनिवर्सिटी को दी थी उसमें घोटाला किया गया। इस आरोप के बाद पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा ने एसएसपी को तहरीर देकर इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

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रोहित मिश्रा की ओर से दी गयी तहरीर के मुताबिक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे स्व रंजीत टोपा ने अमेरिका में रहते हुए यूनिवर्सिटी को अपनी सम्पत्ति से 22,28,307.7 अमेरिकी डॉलर की धनराशि दान में दी थी। यह धनराशि श्रीमती बुलक द्वारा यूनिवर्सिटी को देने के लिये कानूनी तरीके से फ्लोरिडा की कोर्ट में जमा करा दी गयी।

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तहरीर में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति, कुलसचिव और कुलपति के प्रधान सचिव डॉ अनुपम पाण्डेय ने साजिश करके अनुचित ढंग से लाभान्वित करने के लिये नियम के खिलाफ 7 मार्च 2017 को श्रीमती बुलक व ग्लोबल कंपनी को बड़ी धनराशि 21,94,714.56 अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित करा दी गयी जो विधिक रूप से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को मिलनी चाहिये थी।

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यह रकम भारतीय मुद्रा में 3 करोड़, 84 लाख, 6 हजार 900 रुपये होती है जिससे यूनिवर्सिटी को वंचित कर अनधिकृत लोगों को अनुचित ढंग से पैसा दे दिया गया। तहरीर में कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू, कुलसचिव नरेन्द्र कुमार शुक्ला और डॉ. अनुपम पाण्डेय पर षड़ंयंत्र रचकर अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया गया है। यही नहीं दावा किया गया है कि अमेरिकी जासूस जैसन कोवन द्वारा भी यूनिवर्सिटी को पूर्व छात्र रंजीत टोपा द्वारा दी गयी धनराशि हड़प ली गयी है। तहरीर में आरोपियों पर साजिश कर यूनिवर्सिटी की सम्पत्ति हड़पने का आरोप लगाया है।

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गलत अफवाह फैलाने वाले तथ्यों की जांच करें: यूनिवर्सिटी

उधर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि जब भी विश्वविद्यालय में कुछ अच्छा काम होता है, कुछ लोग कहीं से निकल आते हैं विरोध करने के लिये। इन लोगों ने ही कॉलेज में परास्नातक और पीएचडी का विरोध किया था। पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार ने कहा है कि स्व. ईश्वर टोपा ने जो धनाशि दी थी वह मानव संसाधन एवं विकास के संज्ञान में है। 25 मई 2017 को मंत्रालय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को जो पत्र भेजा था उसमें भी 16,46,038.92 डॉलर की बात कही गयी थी। अमेरिकी दूतावास ने भी इसी राशि का उल्लेख किया है। पूरी राशि विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन में दर्शायी गयी है, जो संसद में भी पेश की जा चुकी है। उन्होंने सलाह दी कि गलत अफवाह फैलाने वाले पहले तथ्यों को जांच लें, विश्वविद्यालय का पूरा ध्यान सकारात्मक कार्यों पर है।

By Prasoon Pandey