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भाजपा कांग्रेस और सपा का समीकरण बिगाड़ेगी यह दलित नेता, राजनितिक दलों में बैचनी

छात्रसंघ चुनाव 2018 में जातीय समीकरण को साधने की कोशिश

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इलाहाबाद: इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के सरगर्मी के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने कैम्पस में सबसे पहले अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।अध्यक्ष पद के लिए शैलेश कुमार पासवान उपाध्यक्ष के लिए शिवा पाण्डेय महामंत्री के लिए नीलम सरोज उपमंत्री पद के लिए सोनू यादव को घोषित किया। जिसको लेकर कैम्पस में सपा कांग्रेस और भाजपा के वैचारिक संगठन में ख्ल्बी मची है।पैनल में दो पदों पर महिला उम्मीदवार उतार कर आइसा ने सभी के समीकरण को हिलाया है।दशको बाद पहली बार चुनाव में आइसा सशक्त तरीके से मैदान में है।

इस दौरान आइसा नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जम कर हमला बोला और कहा की यह छात्र संघ के चुनाव का पैनल भले है लेकिन यह नेता केंद्र की सरकार को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि भाजपा को केंद्र सरकार में आए हुए चार साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इलाहाबाद की रैली में घोषणा की थी कि यदि वे सत्ता में आते हैं।तो इविवि की आन बान शान लौटाना उनका प्राथमिक कर्तव्य होगा।लेकिन चार सालों में विश्वविद्यालय की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

अध्यक्ष पद के उम्मीदवार शैलेश पासवान ने कहा कि विश्वविद्यालय को सरकारी छात्र संघठनों ने अकूत पैसे और बाहुबल के प्रदर्शन का अड्डा बना रखा है। जिसके चलते आम छात्रों का छात्रसंघ में आना बहुत मुश्किल हो गया है। ऐसे में छात्रों की मूलभूत समस्याओं पर चुनाव में बात नहीं हो पाती। छात्रसंघ को सत्ता की सीढ़ी के बतौर नहीं बल्कि संघर्ष और सृजन का मंच बनाना होगा।आइसा से उपाध्यक्ष पद की उम्मीदवार शिवा पांडेय ने कहा कि किसी छात्रा का इस परिसर में चुनाव लड़ना किसी आजादी आंदोलन की लड़ाई से कम नहीं है।छात्राओं की सुरक्षा के लिए आइसा लड़ाई आइसा लड़ता रहा है और लड़ेगा।

महामंत्री पद की उम्मीदवार नीलम सरोज ने कहा कि छात्रसंघ महामंत्री का पद अमूमन बाहुबल.धनबल से परिपूर्ण लोग लड़ते हैं।लेकिन इस मानसिकता को तोड़ना होगा। छात्राओं के लिए कॉमन हॉल सभी विभागों में वाशरूम की सुविधा के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। उपमंत्री पद के प्रत्याशी सोनू यादव ने कहा कि छात्रसंघ में आम छात्रों की भागीदारी व प्रतिनिधित्व ही विश्वविद्यालय की समस्याओं से लड़ सकता है। होर्डिंग और काफिलों वाले नेता बस अपना कैरियर संवारने और ठेकेदारी के लिए चुनाव लड़ते हैं।


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