15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकारी राशन दुकानों के लाइसेंसी की मौत पर आश्रितों की नियुक्ति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, अब…

कोर्ट ने इस मामले को सरकार के पास पुनर्विचार हेतु भेजते हुए इस संबंध में नीति बनाने का निर्देश दिया है।

less than 1 minute read
Google source verification
Government ration shop

सरकारी राशन दुकान

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान लाइसेंसधारक के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर दुकान का लाइसेंस धारक के आश्रितों के पिता (मूल आवंटी) की ख्याति को बनाना अनुचित है। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में 17 अगस्त 2002 के शासनादेश का प्रावधान-10 झ अनुच्छेद 14, 15 व 21 का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने इस मामले को सरकार के पास पुनर्विचार हेतु भेजते हुए इस संबंध में नीति बनाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट के प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति को निर्देश दिया है कि वह सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान अनुकम्पा आधार पर किये जाने के संबंध में इस आदेश में की गयी टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए नीति बनायें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने संपूर्णानंद, मनोज यादव, आफान अहमद व कई अन्य की याचिकाओं पर दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि जब तक नयी नीति नहीं बन जाती है अनुकम्पा आधार पर आवंटन की अर्जी लंबित है। गौरतलब है कि शासनादेश की धारा 10 झ में यह प्राविधान है कि जिस आवंटी की ख्याति अच्छी है उसी के आश्रित को अनुकम्पा आधार पर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस दिया जाए। शासनादेश के इसी प्रावधान को याचिकाओं में चुनौती दी गयी थी।

BY- Court Corrospondence