
डॉ. कफील खान
इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद ने गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत मामले में आरोपी डॉ. कफील अहमद को आठ महीने बाद जमानत दे दी है। जस्टिस यशवंत वर्मा की कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जमानत नहीं मिली थी। उनकी जमानत के लिये सिविल सोसाइटी के लोगों ने भी खूब कोशिश की थी। अभी कुछ दिनों पहले ही उन्होंने जेल से चिट्ठी लिखकर बीजेपी सरकार और यूपी के मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करते अपनी बात लिखी थी।
डॉ. कफील के समर्थन में चिकित्सकों का संगठन भी सामने आया था। डॉ. कफील को सितम्बर 2017 में एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। बताते चलें कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2017 के अक्टूबर महीने में ऑक्सीजन की कमी से बड़ी तादाद में बच्चों की मौत हुई थी। उस दौरान डॉ. कफील तब चर्चा में आए थे, जब अपने निजी प्रयासों से दोस्तों व निजी अस्पतालों से किसी तरह ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर बीआरडी अस्पताल पहुंचने की खबरें मीडिया में आयीं। इसके बाद तो वह मीडिया में मसीहा बन गए। हालांकि बाद में उन पर निजी प्रैक्टिस करने समेत कई आरोप भी लगे।
इसके बाद जब इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई तो इसमें डॉ. कफील का भी नाम था। आरोपी बीआरडी के पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी कानपुर से गिरफ्तार कर ली गयीं। इन लोगों के साथ ही पुष्पा सेल्स के दो अधिकारी भी इसमें नामदज किये गए थे। बच्चों की मौत मामले में चीफ सेक्रेटरी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपी, जिसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर पूर्व प्रिंसिपल आरके मिश्रा समेत कुल पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
कफील ने जेल से लिखी थी चिट्ठी
जमानत मिलने के कुछ दिन पहले ही डॉ. कफील खान ने जेल से एक चिट्ठी लिखकर अपने हालात बयां करते हुए अपने कैद रहने का कारण पूछा था। चिट्ठी के मजमून से यह इशारा साफ था की बीआरडी कॉलेज में बच्चों की मौत मामले में प्रशासनिक लापरवाही छुपाने के चलते ही उन्हें फंसाया गया है। उन्होंने 10 पेज की चिट्ठी में अपनी व्यस्था व्यक्त की थी और शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया था।
चिट्ठी के कुछ खास प्वाइंट
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसलिये नाराज थे क्योंकि यह खबर किसी तरह मीडिया में पहुंच गयी।
- मुख्यमंत्री इस बात से भी नाराज थे और उन्होंने कहा भी था कि, तुम्हें लगता है कि सिलिंडरों की व्यवस्था कर देने से तुम हीरो बन गए, फिर बोले मैं इसे देखता हूं।
- चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि पुलिस उनके घर गयी, परिवार को डराया-धमकाया गया और मुझे इनकाउंटर तक की चेतावनी दी गयी।
- डॉ. कफील ने खत में लिखा है कि उन्हें जेल में काफी यातनाओं से गुजरना पड़ रहा है। शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है और एक ही बैरक में डेढ़ सौ कैदी हैं, फर्श पर सोना पड़ता है।
- उन्होंने अपने केस को न्याय प्रक्रिया के हनन का क्लासिकल उदाहरण तक लिखा है।
- उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि पुष्पा सेल्स ने अपनी 68 लाख रुपये की बकाया राशि के लिये लगातार 14 बार रिमाइंडर भेजा बावजूद इसके किसी ने संज्ञान नहीं लिया।
- ऐसे में लापरवाही हुई और कार्यवाही नहीं की गयी तो इसके लिये गोरखपुर के डीएम, डीजीमेडिकल एजुकेशन, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख दोषी हैं।
- लिखा है कि अगर पुष्पा सेल्स ने अचानक लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी तो उसके लिये मैं जिम्मेदार कैसे हो गया।
- मुझे जेल में डालकर बलि का बकरा बनाया गया है ताकि सच हमेशा सलाखों के पीदे दफ्न रहे।
- चिट्ठी में उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने 10 अगस्त को मैंने वही किया जो एक डॉक्टर को करना चाहिये।
- डॉ. कफील ने चिट्ठी में दावा किया है कि विभागाध्यक्ष ने 10 अगस्त को छुट्टी की इजाजत दी थी। छुट्टी पर होने के बावजूद अपना कर्तव्य निभाने अस्पताल पहुंच जाना क्या यही मेरा गुनाह है।
Published on:
25 Apr 2018 05:53 pm
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