
Doodhnath singh
इलाहाबाद. हिन्दी साहित्य जगत के जाने माने साहित्यकार दूधनाथ सिहं का गुरूवार देर रात निधन हो गया। मूल रूप से बलिया के रहने वाले जनवादी लेखक दूधनाथ सिंह पिछले एक साल से बिमार चल रहे थे। वह प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चल रहा था।
26 दिसंबर को दिल्ली से इलाहाबाद लौटने के बाद झूंसी एडीए खण्ड 7 प्रतिष्ठानपुरी आवास पर तीन दिन बाद अचान उनकी तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें इलाबाद सिविल लाइन स्थित फीनिक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
बीते बुधवार हार्ट अटैक के बाद उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। जिसके बाद गुरूवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 1994 में इलाहाबाद विश्व विद्यालय से रिटायर हुए थे। वहीं उनके मौत की खबर मिलने के बाद साहित्य जगत मे शोक की लहर दौड़ गई।
उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान भारत-भारती से सम्मानित दूधनाथ सिंह की प्रमुख रचनाएं
उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान भारत-भारती व मध्य प्रदेश सरकार के शिखर सम्मान मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से सम्मानित दूधनाथ सिंह ने आखिरी कलाम, लौट आ ओ धार, सपाट चेहरे वाला आदमी, सुखांत, प्रेमकथा का अंत न कोई, माई का शोकगीत, सपाट चेहरे वाला आदमी, यमगाथा, धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे, निराला : आत्महंता आस्था जैसी कालजयी कृतियों की रचना की। उनकी गिनती हिन्दी के शीर्ष लेखकों में होती है।
इच्छानुसार दान की जाएंगी उनकी आंखे
परीवारीजनों की माने तो दूधनाथ की उनकी इच्छा थी कि, उनकी मृत्यु के बाद उनकी आखें दान कर दी जाए। पिता की इच्छानुसार उनके बेटों अनिमेष ठाकुर, अंशुमन सिंह और बेटी अनुपमा ठाकुर ने उनकी आंखे दाने देने का फैसला लिया। जिसके बाद मेडिकल कालेज को उनकी आंखे दान की जाएंगी।
रसूलाबाद घाट पर दोपहर 2 बजे होगा अंतिम संस्कार
देर रात निधन के बाद दूधनाथ सिंह का पार्थिव शरीर प्रतिष्ठानपुरी झूंसी स्थित आवास पर ले जाया गया। यहां अंतिम दर्शन के बाद शुक्रवार दोपहर रसूलाबाद घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। माना जा रहा है कि माघ मेला लगा होने के कारण झूंसी में अंतिम संस्कार नहीं किया जा रहा।
Updated on:
12 Jan 2018 09:42 am
Published on:
12 Jan 2018 09:39 am
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