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इलाहाबाद की इस बेटी ने कायम की मिसाल, मां  की सेवा के लिए छोड़ा पति का घर

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमला शंकर कोंकणे का निधन, बेटी ने दी मुखाग्नि

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Ashish Kumar Shukla

Jun 28, 2016

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इलाहाबाद. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माॅ का साथ बेटों ने छोड़ा तो बेटी ने माॅ की सेवा के लिए पति का घर छोड़कर एक बेटी होने की मिसाल कायम की और माॅ की अर्थी को कंन्धा देने के साथ चिता को मुखाग्नि देकर यह साबित किया की बेटो से बेटियाॅ कमजोर नही होती हैं।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व वरिष्ठ पत्रकार शंकर गणपति कोंकणें की पत्नी कमला शंकर कोंकणें का कल निधन हो गया। 95 वर्षीय कमला शंकर लम्बे समय से बिमार चल रही थी। 30 वर्ष पूर्व पति की मृृत्यु के बाद वह अकेली ही रह रही थी। कोंकणें दम्पति को चार संताने हुयी जिनमें दो बेटे और दो बेटियाॅ हैं। दोनों बेटे मध्य प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारी हैं, उनका बड़ा बेटा एक दुर्घटना के कारण शारीरिक रूप से विकलांग हो गया हैं। जबकी दूसरा बेटा इन्हें इनके हालात पर छोड़ गया और फिर लौट कर इनकी सुध नही ली।
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आजादी की लड़ाई में पति के कन्धें से कन्धा मिलाकर लड़ने वाली बहादुर कमला कोंकणें आखिर में अपनो से हार गयी । दो बेटियाॅ जिसमें से बड़ी बेटी अपने परिवार के साथ चेन्नई और छोटी बेटी पूणे मे रहती है। लगभग चार साल पहले अपनी माॅ से मिलने आयी छोटी बेटी वंदना माॅ की हालत को देखकर उनको अपने साथ पूणे ले गयी लेकिन उनके पति ने अपनी सास को अपने घर में रखने से इन्कार कर दिया। और पत्नी के सामने यह शर्त रखी की मेरे साथ रहो या फिर अपनी माॅ के साथ जिस पर वह अपनी माॅ को लेकर इलाहाबाद आ गयी और फिर दोबारा अपने पति के पास नही गयी। तब से लेकर अब तक वह अपनी माॅ के साथ ही रही वंदना ने बताया कि कल माॅ ने अपनी आखिरी सांस मेरी गोद में ही ली।
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घर में केवल माॅ बेटी ही थी मौत की खबर मिलने पर पड़ोसी और कई समाज सेवी संस्था के लोग एकत्रित हुए जिला अधिकारी को फोन किया गया। जिस पर घण्टों इन्तजार के बाद नायाब तहसीलदार पहुॅचे और पुष्प गुच्छ भेंट करते हुए चलते बने। परिवार की माली हालत इतनी खराब है की दाह संस्कार के लिए भी पड़ोसियों ने चन्दा लगाया और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमला कोंकणें का अन्तिम संस्कार किया। माॅ की मौत पर बेटो के ना आने से बेटी वंदना ने ही माॅ को कंधा दिया और मुखाग्नि दी और समाज को यह बताया की बेटियाॅ बेटो से कम नही।

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