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Nikay Chunav: आखिर कौन हैं गणेश केशरवानी, जिनके लिए भाजपा ने काटा नंदी की पत्नी का टिकट

Nikay Chunav: भाजपा ने इस बार निकाय चुनाव में नंद गोपाल नंदी की पत्नी अभिलाषा का टिकट काटकर गणेश केशरवानी को टिकट दिया है।

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दांए नंदी दंपत्ती बांए गणेश केशरवानी

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को भारतीय जनता पार्टी निकाय चुनाव को मिनी लोकसभा चुनाव मानकर लड़ रही है। पहले चरण के चुनाव के लिए जब पार्टी ने मेयर प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की तो लोगों चौंक गए। दरअसल पार्टी ने अपने लगभग सारे मेयरों का टिकट काट दिया। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये थी कि इस लिस्ट में योगी सरकार में मंत्री नंद गोपाल नंदी की पत्नी और 2 बार की मेयर अभिलाशा गुप्ता का भी पार्टी ने टिकट काट दिया।

भाजपा के महानगर अध्यक्ष हैं केशरवानी
उमेश चंद्र गणेश केशरवानी भाजपा के महानगर अध्यक्ष है। वह इससे पहले 2012 में पार्षद भी रह चुके है, इस वक्त उनकी सीट पर उनकी पत्नी पार्षद है। बताया जाता है कि केशरवानी का भाजपा के बड़े नेताओं से अच्छे संबंध है। 2014 औरल 2017 के चुनावों में पार्टी के लिए उनहोंने जमकर मेहनत किया। तब से ही वह पार्टी नेताओं के नजरों में थे। इस बार जब निकाय चुनाव में उन्होंने मेयर के पद के लिए आवेदन किया तो पार्टी ने उनके नाम पर मुहर लगा दिया।

रामजन्मभूमि आंदोलन में निभाई थी सक्रिय भूमिका
बनिया समुदाय से आने वाले केशरवानी प्रयागराज में ट्रांसपोर्ट के बिजनेस से जुड़े हुए है। उन्होंने सामान्य कार्यकर्ता के रूप में भाजपा से 1987 में जुड़े। इसके बाद अयोध्या में 1989 में हुई राम जन्मभूमि आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।

भाजपा में बूथ अध्यक्ष के रूप में काम करते हुए वह मंडल उपाध्यक्ष, मंडल महामंत्री, मंडल संयोजक, महानगर मंत्री, महानगर उपाध्यक्ष, महानगर महामंत्री, प्रदेश कार्य समिति सदस्य, स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक भी बने। छह दिसंबर 2019 को वह भाजपा महानगर के अध्यक्ष बने।

पार्षद रहते निगम में कराए थे बदलाव
भाजपा के मेयर प्रत्याशी गणेश केसरवानी 2012 में कृष्णा नगर वार्ड से पहली बार पार्षद के रूप में चुने गए। इसके बाद 2017 में हुए चुनाव में भाजपा ने उनकी पत्नी को पत्नी सविता केसरवानी को टिकट दे दिया। उनके लीडरशीप में अखिलेश सरकार में पार्षद के रूप में टैक्स वृद्धि के विरोध में किया गया आंदोलन तब खासा सुर्खियों में था। नगर निगम की बैठक के पहले वंदे मातरम का गायन भी उन्होंने अनिवार्य करवाया।