
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात साल से जेल में बंद हत्या आरोपियों को दी जमानत, जानिए क्यों
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात साल से जेल में बंद हत्या के आरोपियों को जमानत दे दी है। जमानत देने से पहले कोर्ट ने कहा कि कि निकट भविष्य में मुकदमे के समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है और तथ्य गवाह, अभियोजन गवाह ट्रायल में सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने 27 मई, 2015 से जेल में बंद रामेश्वर पांडे की तीसरी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ धारा 302, 504, 506 आईपीसी के तहत दर्ज मामले के संबंध में आदेश दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष आवेदक की ओर से पेश वकील ने यह प्रस्तुत किया कि 7 अगस्त, 2018 को सत्र के समक्ष परीक्षण की प्रतिबद्धता के बावजूद तथ्य गवाह 28 अक्टूबर, 2021 तक अनुपस्थित रहे, और वे जमानती और गैर जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद ही अदालत के सामने पेश हुए। अंत में, यह तर्क दिया गया कि चूंकि सभी तथ्य गवाहों की जांच की गई है और इस बात की कोई संभावना नहीं है कि निकट भविष्य में मुकदमा समाप्त हो जाएगा। इसलिए वर्तमान आवेदक की लगभग सात साल की कैद की अवधि को जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में अभियोजन पक्ष के कुछ और गवाहों की परीक्षा होनी बाकी है और उसके बाद औपचारिक गवाहों जैसे पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर, एफआईआर और जांच अधिकारी आदि। अदालत ने आगे कहा कि उनकी जांच के बाद बचाव पक्ष के गवाहों से पूछताछ की जाएगी और कानूनी आवश्यकताओं को अपनाते हुए मुकदमे को अंतिम रूप से समाप्त किया जाएगा।
कोर्ट ने पारस राम विश्नोई बनाम निदेशक, केंद्रीय जांच ब्यूरो क्रिमिनल अपील संख्या 693/2021 और यूनियन ऑफ इंडिया बनाम केए नजीब एलएल 2021 एससी 56 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को उनकी लंबी अवधि की कैद को ध्यान में रखते हुए जमानत देने का समर्थन किया था।
Published on:
05 Apr 2022 12:58 pm
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