
अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का पर्दाफाश
इलाहाबाद. पुलिस ने इंटरनेशनल लेवल पर टेलीफोन एक्सचेंज का संचालन करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस अवैध एक्सचेंज का संचालन दुबई में बैठे नटवरलाल कर रहे थे। राजधानी लखनऊ में दो अवैध एक्सचेंज से अन्तरराष्ट्रीय काॅल कराने वाले गिरोह ने अपना पहला सेटअप इलाहाबाद के फाफामऊ में लगाया था।
इस अवैध एक्सचेंज के माध्यम से भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल सहित अन्य खाड़ी देशों में बात होती थी। ऐसे में देश की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। इस टेलीफोन एक्सचेंज का मास्टर माइंड गोरखपुर के उरूवा बाजार निवासी नसीम और फाफामऊ निवासी दिलशाद ने मिलकर खोला था। दिलशाद दो महीने पहले दुबई चला गया। वहीं से इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले की जानकारी पुलिस को शनिवार को हुई।
शनिवार को लखनऊ में पुलिस ने अवैध एक्सचेंज से देश की सुरक्षा और राजस्व को चूना लगाने वाले गिरोह के गोरखपुर निवासी नूर मोहम्मद और मनोज कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया था। पुलिस को इन दोनों के पास से भारी संख्या में अवैध पासपोर्ट, सिमकार्ड, लैपटाॅप, डाटा केबल, राउटर व वाउचर बरामद किया था। इसी पूछताछ के दौरान इलाहाबाद के फाफामऊ मेें अवैध फोन एक्सचेंज का मामला सामने आया। इस अवैध फोन एक्सचेंज को इसी साल अप्रैल में खोला गया था। इस एक्सचेंज में 8 एमबीपीएस स्पीड की तीन मशीनें लगाई गईं थी।
इसके बाद नसीम और दिलशान बेहतर नेटवर्क वाले स्थान की तलाश कर रहे थे। लखनऊ उनकी पहली पसंद बनी। उन्होंने लखनऊ में ही मकान तलाशा और हजरतगंज के तेजकुमार प्लाजा में बेसमेंट को किराए पर लिया था। पुलिस को जैसे ही इलाहाबाद के फाफामऊ में स्थित नेटवर्क की जानकारी हुई। उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल इलाहाबाद और गोरखपुर में छापेमारी शुरू करने के लिए टीम भेजी। पुलिस इस मामले में इलाहाबाद सहित अन्य जगहों पर छापेमारी शुरू कर दी है।
इलाहाबाद से लखनऊ ले गए थे सामान
प्राप्त जानकारी के अनुसार जालसाजों ने लखनऊ में एक्सचेंज बनाने लिए सारा सामान इलाहाबाद से लेकर गए थे। जिसमें सिम बाॅक्स, एंटीना, लैपटाॅप, राउटर, सहित अन्य चीजें शामिल थी। लनखऊ में इसी साल जुलाई में अवैध एक्सचेंज के माध्यम से इंटरनेशनल काॅलिंग का धंधा शुरू किया था। यहां 16 एमबीपीएस की स्पीड मिलते ही इनका धंधा जबरदस्त चलने लगा। इसके बाद नूर मोहम्मद के माध्यम से दूसरा सेटअप लगाया गया। इस दौरान जब काम तेजी से चलने लगा तो नूर ने गोरखपुर से मनोज को बुलवाया और किराए के मकान में एक और सेटअप लगावाया। अब यहीं से आईएसडी काॅल को लोकल में कन्वर्ट कर बात कराने लगे। इंटरनेशनल काॅल प्रति पल्स 50 पैसे पड़ती थी। इसके एवज में जालसाजों को 10 से 15 रूपये तक मिलते थे।
113 मंे से 100 बीएसएनएल के, अधिकारियों पर शक
अवैध एक्सचेंज चलाने वाले जालसाजों के पास से पुलिस ने 113 सिम बरामद किया है। इसमें से 100 सिम बीएसएनएल के हैं। सभी सिम इलाहाबाद के एक ही स्थान से एक साथ जारी किए गए हैं। ऐसे में पुलिस को शक है कि इस मामले में बीएसएनएल के कई अधिकारी और कर्मचारी भी जुड़े हैं। जिन्होंने जालसाजों को हाईस्पीड के लिए लखनऊ के बारे मंे जानकारी दी थी।
Updated on:
14 Nov 2017 09:11 am
Published on:
14 Nov 2017 09:08 am
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