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 इलाहाबाद की अक्षिता बनी  भारत की सबसे कम उम्र की ब्लाॅगर

हिंदी ब्लॉगिंग ने पूरे किये तेरह वर्ष

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Ashish Kumar Shukla

Apr 21, 2016

इलाहाबाद. न्यू मीडिया के इस दौर में ब्लॉगिंग लोगों के लिए अपनी बात कहने का सशक्त माध्यम बन चुका है। राजनीति की दुनिया से लेकर फिल्म जगत, साहित्य से लेकर कला और संस्कृति से जुडे़ तमाम नाम ब्लॉगिंग से जुडे हुए हैं। आज ब्लॉग सिर्फ जानकारी देने का माध्यम नहीं बल्कि संवाद, प्रतिसंवाद, सूचना विचार और अभिव्यक्ति का भी सशक्त ग्लोबल मंच है।

हिंदी में ब्लागिंग का आरम्भ वर्ष 2003 में हुआ। उत्तर प्रदेश को जहां साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, कला का गढ़ माना जाता है, वहीं ब्लॉगिंग के क्षेत्र में भी यहां तमाम उपलब्धियां दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश के चर्चित हिंदी ब्लॉगर एवं भारतीय डाक सेवा में निदेशक कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि पूर्णतया हिन्दी में ब्लॉगिंग आरंभ करने का श्रेय आलोक को जाता है, जिन्होंने 21 अप्रैल 2003 को हिंदी के प्रथम ब्लॉग नौ दो ग्यारह से आगाज किया। सार्क देशों के सर्वोच्च परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान से सम्मानित एवं नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले श्री यादव जहां अपने साहित्यिक रचना धर्मिता हेतु ह्यशब्द-सृजन की ओर ब्लॉग लिखते हैं, वहीं डाक विभाग को लेकर ह्यडाकिया डाक लायाह्य नामक उनका ब्लॉग भी चर्चित है।

वर्ष 2015 में हिन्दी का सबसे लोकप्रिय ब्लॉग चुना गया और इसकी मॉडरेटर इलाहाबाद की आकांक्षा यादव को हिन्दी में ब्लॉग लिखने वाली शुरूआती महिलाओं में गिना जाता है। ब्लॉगर दम्पति कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को ह्यदशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पतिह्य, ह्यपरिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मानह्य के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा नवम्बर, 2012 में ह्वन्यू मीडिया एवं ब्लॉगिंग में उत्कृष्टता के लिए अवध सम्मान से भी विभूषित किया जा चुका है। इस दंपती ने वर्ष 2008 में ब्लॉग जगत में कदम रखा और विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लॉग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लॉगिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लॉगिंग को भी नये आयाम दिये।

ब्लॉगर दम्पति यादव की नौ वर्षीया सुपुत्री अक्षिता को भारत की सबसे कम उम्र की ब्लॉगर माना जाता है। अक्षिता की प्रतिभा देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2011 में उसे ह्यराष्ट्रीय बाल पुरस्कारह्य से सम्मानित किया, वहीं पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्रीलंका में उसे ह्यपरिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान से भी सम्मानित किया गया। हिंदी ब्लॉगिंग की दशा और दिशा पर पुस्तक लिख रहे चर्चित ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आज हिन्दी ब्लॉगिंग में हर कुछ उपलब्ध है, जो आप देखना चाहते हैं। हर ब्लॉग का अपना अलग जायका है। यहां खबरें हैं, सूचनाएं हैं, विमर्श हैं, आरोप-प्रत्यारोप हैं और हर किसी का अपना सोचने का नजरिया है। तेरह सालों के सफर में हिंदी ब्लागिंग ने एक लम्बा मुकाम तय किया है। आज हर आयु-वर्ग के लोग इसमें सक्रिय हैं, शर्त सिर्फ इतनी है कि की-बोर्ड पर अंगुलियां चलाने का हुनर हो।

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