
लाखों रुपये लेकर मेडिकल प्रमाणपत्र बांटने वाला अंतर्राज्यीय गिरोह का सरगना प्रयागराज से गिरफ्तार (Source: Police Media Cell)
STF Action Fake BAMS Degree: उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में फर्जी बीएएमएस (BAMS) डिग्री, मार्कशीट और मेडिकल प्रमाणपत्र तैयार कर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का स्पेशल टास्क फोर्स (STF) प्रयागराज ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के मुख्य सरगना मो. तारूक को प्रयागराज के करेली क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई STF फील्ड यूनिट प्रयागराज के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह न केवल शैक्षिक धोखाधड़ी में संलिप्त था, बल्कि फर्जी मेडिकल डिग्रियों के आधार पर इलाज कर आम जनता के स्वास्थ्य से भी खुला खिलवाड़ कर रहा था।
गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मो. तारूक पुत्र शेर अली, निवासी जीटीवी नगर, करेली, प्रयागराज के रूप में हुई है। अभियुक्त की गिरफ्तारी 09 जनवरी 2026 की रात लगभग 11 बजे की गई। STF टीम ने उसे उसके कार्यालय/क्लीनिक सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर, करेली से गिरफ्तार किया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अभियुक्त ने अपने अवैध धंधे को छिपाने के लिए एक क्लीनिक और मेडिकल रिसर्च सेंटर की आड़ ले रखी थी। इसी स्थान से वह कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों के माध्यम से देश के अलग-अलग मेडिकल संस्थानों के नाम पर फर्जी बीएएमएस डिग्री और मार्कशीट तैयार करता था।
STF टीम द्वारा मौके से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। बरामदगी में 1 कंप्यूटर CPU,1 मोबाइल फोन,1 पेन ड्राइव (32 GB),68 फर्जी मार्कशीट/डिग्री/प्रमाणपत्रों की प्रतियां शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि पेन ड्राइव और कंप्यूटर में फर्जी दस्तावेजों का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार मो. तारूक विभिन्न राज्यों के मेडिकल कॉलेजों और आयुर्वेदिक संस्थानों के नाम पर बीएएमएस की फर्जी डिग्री, मार्कशीट और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र तैयार करता था। वह खुद को प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा बताकर बेरोजगार युवाओं और मेडिकल क्षेत्र में काम करने के इच्छुक लोगों को झांसे में लेता था। एक फर्जी डिग्री के बदले वह 6 लाख से 10 लाख रुपये तक की रकम वसूलता था। यह पैसा अलग-अलग बैंक खातों में किश्तों के रूप में लिया जाता था ताकि किसी को शक न हो।
मामले में शिकायतकर्ता ब्रह्मानन्द, निवासी मिर्जापुर, ने पुलिस को बताया कि अभियुक्त ने उससे लगभग 6 लाख रुपये लेकर आजमगढ़ और जौनपुर के मेडिकल संस्थानों के नाम पर फर्जी बीएएमएस डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराई थी। जब दस्तावेजों की जांच कराई गई तो वे पूरी तरह कूटरचित पाए गए। इस शिकायत के बाद ही STF ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ी कार्रवाई सामने आई।
पूछताछ में एक और बेहद गंभीर खुलासा हुआ है। अभियुक्त मो. तारूक ने अपनी पत्नी के नाम से भी फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार की थीं। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह और उसकी पत्नी कथित रूप से गंभीर बीमारियों का इलाज करते रहे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए सीधा खतरा है। बिना वैध डिग्री के इलाज करना कानूनन अपराध है और इससे लोगों की जान भी जा सकती है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। अभियुक्त ने कई राज्यों के मेडिकल संस्थानों के नाम पर फर्जी बीएएमएस डिग्रियां जारी की हैं। अब तक कई लोगों को अलग-अलग राज्यों के नाम पर डिग्रियां दिए जाने की बात सामने आई है। STF को आशंका है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जाएगी।
गिरफ्तार अभियुक्त के खिलाफ थाना करेली, कमिश्नरेट प्रयागराज में मु.अ.सं. 10/2026 धारा 318(2), 338, 336(3), 340 भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा 66 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अभियुक्त के विरुद्ध आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने STF प्रयागराज की इस कार्रवाई को सराहनीय बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस गिरोह का पर्दाफाश न होता तो समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता था। फर्जी डॉक्टरों द्वारा इलाज करना आम नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी मेडिकल डिग्री या प्रमाणपत्र की सत्यता अवश्य जांचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या STF को दें।
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Published on:
11 Jan 2026 10:05 am
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