
संवाद सेतु
प्रयागराज. मौजूदा शिक्षा नई पीढ़ी को देश से दूर कर रही है। बच्चों को जो शिक्षा दी जा रही है उसमें स्थानीय भूगोल, इतिहास का समावेश नहीं है। दरअसल पूरी शिक्षा आईक्यू आधारित है। इसमें मन या आत्मा के लिए जगह नहीं है। अगर ये कहा जाए कि तकनीकी आधारित शिक्षा मनुष्यता को खत्म कर रही है। ये कहना रहा पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का।
प्रयागराज के सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित एक होटल में शहर के गणमान्य नागिकों संग रू-ब-रू संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा शिक्षा ही है जिसके चलते बच्चे भारतीय संस्कृति, संस्कारों से कटते जा रहे हैं। वसुधैव कुटुंबकम का भाव ही खत्म हो चुका है। कोठारी ने हर अभिभावक को पारिवारिक और देशज परंपरा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित करने की पहल करनी होगी। इसके लिए उन्हे बच्चों को रोजाना समय देना होगा। नियमित तौर पर बच्चो के साथ आधा घंटा भी अभिभावक बिताने लगें तो परिस्थितियां बदल सकती हैं।
उदासीन समाज को जागृत करना होगा
पत्रिका समूह के इस अभियान की जितनी भी सराहना की जाए कम है। सही है कि आज का समाज पूरी तरह से उदासीन हो गया है जिसे जागृत करना होगा और इसके लिए सभी को एकजुट हो कर प्रयास करना होगा। साथ ही तीर्थ राज प्रयाग इलाहाबाद की पौराणिक पहचान को अक्षुण्ण रखने का कोई प्रयास नहीं हो रहा। फिलहाल तो माघ मेला, कुंभ मेला जैसे मेलों के वक्त कुछ व्यवस्था की जाती है। शासन-प्रशासन की ओर से प्रयास होता है। लेकिन इस शहर की पौराणिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए कुछ नहीं हो रहा जो अनवरत होते रहना चाहिए।- वैभव गिरि
शहर में मुद्दे तो बहुत हैं, उठाए भी जाते हैं पर कोई सुनने वाला नहीं
इस शहर में मुद्दों की कमी नहीं है। समय-समय पर मुद्दे उठाए भी जाते हैं, पर कोई सुनने वाला नहीं। जब किसी बात की कहीं कोई सुनवाई नहीं होगी तो बेहतरी कैसे संभव है।- अवंतिका टडन
थर्ड जेंडर की समाज में कोई पूछ नहीं, कोई सम्मान नहीं
थर्ड जेंडर समाज का हिस्सा होते हुए भी समाज से अगल है। इनकी कोई पूछ नहीं, कोई सम्मान नहीं। सबसे बड़ी बात थर्ड जेंडर बच्चों को बचाना, उन्हें संभालना है। लोग शर्म के चलते ऐसे बच्चों को छिपा देते हैं। ये गलत हैं। हम समाज का हिस्सा हैं तो हमे भी यथोचित सम्मान मिलना ही चाहिए।- कौशल्या, महामंडलेश्वर किन्न समाज
लंबे समय से बंद उद्योग फिर से चालू किए जाएं
इलाहाबाद की पहचान महज हाईकोर्ट और संगम तक सीमित रह गई है। यहां के कल कारखाने जो बंद हो गए उन्हें फिर से चालू करना चाहिए ताकि औद्योगिक गतिविधियां तेज हों, इससे युवाओ को रोजगार भी मिलेगा और स्वदेशी उत्पादन भी बढ़ेगा।- विजय अरोड़ा, व्यापार मंडल
प्रयागराज से सरकारी कार्यालयो को अन्यत्र स्थानांतरित न किया जाए
प्रयागराज एक तरह से प्रदेश का मिनी सचिवालय रहा। लेकिन धीरे-धीरे एक-एक कर के कई कार्यालयों को यहां से दूसरे शहरों में स्थानांतरित किया जा रहा है जो सही नहीं। इससे व्यापार घट रहा है। इन कार्यालयो को पुनः प्रयागराज में स्थापित किया जाए।- सुशील खरबंदा
वैश्विीकरण के साथ नैतिक शिक्षा का हो सामांजस्य
वैश्वीकरण के दौर में सबसे ज्यादा नुकसान नैतिक शिक्षा को हुआ है। नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है।- आरके यादव
स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी पिछड़ा है प्रयागराज
प्रयागराज में साहित्यिक गतिविधियां हैं, संस्कृति संरक्षण के लिए प्रयास होते हैं, सामाजिक सौहार्द भी ठीक है। पर अगर कुछ नहीं है तो वो स्वास्थ्यगत व्यवस्था नहीं है। कोरोना काल में लोग आसपास के जिलों में भाग रहे थे। यह सबसे बड़ा मुद्दा है। स्वास्थ्य सुविधा में बढ़ोत्तरी का प्रयास होना चाहिए।- धनंजय चोपड़ा
कला और संस्कृति के संरक्षण को मिले महत्व
कला और संस्कृति के संरक्षण पर फोकस होना चाहिए। खास तौर पर लोक कलाओं को ज्यादा समर्थन की जरूरत है। इससे भावी पीढ़ी भी अपने अतीत और अपनी पहचान को जान पाएगी। संवेदनशीलता बढेगी।-मधु शुक्ला
स्थानीयता को बचाना होगा
वैश्वीकरण के प्रभाव से स्थानीयता गायब हो रही है। इसे बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। सुषमा शर्मा
इन्होंने भी रखे विचार
संवाद सेतु में विप्लव कुमार, एसके यादव पल्लवी चंदेल, सुरभि त्रिपाठी, दिनेश सिंह, लालजी मित्तल, अधिवक्ता लालमणि तिवारी आदि ने भी विचार रखे।
इससे पूर्व पत्रिका समूह के डिप्टी एडिटर भुवनेश जैन ने समूह की विकास यात्रा की जानकारी दी। up.Patrika.com के स्टेट हेड महेंद्र प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पत्रिका समाचार पत्र का परिचय दिया।
Published on:
15 Dec 2021 07:41 pm
बड़ी खबरें
View Allप्रयागराज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
