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इलाहाबाद हाईकोर्ट: बार एसोसिएशन के महासचिव ने जाने क्यों मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

दाखिल मुकदमे दो से ढाई माह बाद कोर्ट में पेश किए जा रहे हैं।इसमें सुधार लाकर नियमानुसार दाखिले के तीसरे दिन कोर्ट में पेशी सुनिश्चित कराई जाए। यह भी कहा गया है कि अनलिस्टेड केस की 25 की सीमा हटाई जाय और लेफ्ट ओवर या पास ओवर केस एक हफ्ते में दुबारा सूचीबद्ध किया जाए।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट: बार एसोसिएशन के महासचिव ने जाने क्यों मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट: बार एसोसिएशन के महासचिव ने जाने क्यों मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव सत्यधीर सिंह जादौन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कोरोना काल के बाद भी समस्याओं के अंबार की तरफ ध्यान आकर्षित किया गया। मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि नये दाखिल मुकद्दमो की रिपोर्टिंग में अनावश्यक देरी हो रही है समय घटाकर रिपोर्टिंग दो-तीन दिन में पूरी की जाए। दाखिल मुकदमे दो से ढाई माह बाद कोर्ट में पेश किए जा रहे हैं।इसमें सुधार लाकर नियमानुसार दाखिले के तीसरे दिन कोर्ट में पेशी सुनिश्चित कराई जाए। यह भी कहा गया है कि अनलिस्टेड केस की 25 की सीमा हटाई जाय और लेफ्ट ओवर या पास ओवर केस एक हफ्ते में दुबारा सूचीबद्ध किया जाए।

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हालांकि पूर्व उपाध्यक्ष एस के गर्ग व राजस्व परिषद बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव विजय चंद्र श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट प्रशासन से कोरोना काल की समाप्ति पर काजलिस्ट का प्रकाशन शुरू करने की मांग मुख्य न्यायाधीश से की है।इनका कहना है कि केस लिस्ट में छपे होते हैं, अधिवक्ता का नाम भी छपा होता है किन्तु हाईकोर्ट से कई में केस लगे होने का मैसेज अधिवक्ता को नहीं भेजा जाता । जिसके कारण सुनवाई टल जाती है अथवा केस अधिवक्ता की गैर मौजूदगी के कारण खारिज कर दिया जाता है।

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मुकद्दमा दुबारा कोर्ट में लगवाना टेढी खीर साबित हो रहा है। आदर्श अधिवक्ता संघ अध्यक्ष शरद चंद्र मिश्र व प्रयागराज अधिवक्ता संघ अध्यक्ष नरेंद्र कुमार चटर्जी का कहना है कि हाईकोर्ट परिसर में वाई फाई ठीक से काम नहीं करता। वेबसाइट नहीं खुलती और आये दिन वेबसाइट की मरम्मत होती रहती हैं।या लोड के कारण कुछ भी सर्च नहीं हो पाता। बार सदस्यों की कठिनाइयों का समाधान किये बगैर न्यायिक कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाना कठिन है। अधिवक्ताओं ने न्यायालय प्रशासन से अधिवक्ताओं की कठिनाइयों पर ध्यान देकर न्याय व्यवस्था फिर से पटरी पर लाने की मांग की गई है।