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जिस्मफरोशी के बाद शबनम ने छोड़ दिया इस्लाम और फिर हिंदुत्व की राह पर चलकर बनीं महामंडलेश्वर, पढ़िये ये सच्ची और हैरान कर देने वाली कहानी

किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मीकि 2 साल पहले तक शबनम बेगम के नाम से चर्चित थीं।

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Shabanam

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प्रयागराज। खूबसूरती किस तरह दुश्मन बन जाती है, ये दर्द बयां किया किन्नर अखाड़े की महमंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मीकि ने। पेट पालने के लिए जिस्मफरोशी की। इसके बाद इस्लाम धर्म छोड़ा और हिंदू धर्म में आस्था दिखाते हुए महामंडलेश्वर बनीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 13 साल की उम्र में घर छोड़ने के बाद उनकी खूबसूरती ही उनकी दुश्मन बन गई। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि 11 वर्ष की उम्र में उनके एक करीबी ने रेप भी किया।


ये बताई कहानी
कुंभ 2019 प्रयागराज में आईं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मिकी ने अपना वो दर्द बयां किया, जो हैरान कर देने वाला है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले तक किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ शबनम बेगम के नाम से चर्चित थीं। मां भवानी नाथ ने 2010 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म कबूल लिया था, लेकिन 5 साल बाद उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया। वर्ष 2016 में वो अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में धर्मगुरु बनीं। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने पिछले साल 2017 में उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी।

दिल्ली में हुआ जन्म
मां भवानी नाथ ने बताया कि वे कुल 8 भाई-बहन हैं। उनका जन्म दिल्ली के चांदिकापुरी में हुआ था। परिवार बेहद गरीब था, ऐसे में दो वक्त का खाना भी मुश्किल से नसीब होता था। मां भवानी नाथ जब 10 साल की थीं तो उन्हें पता चला कि वो एक किन्नर हैं, जिसके बाद 13 साल की उम्र में किन्नर समाज के पास चली गईं थीं, जहां उनकी पहली गुरु नूरी बनीं। 2014 में मां भवानी नाथ ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर स्त्री-पुरुष के अलावा थर्ड जेंडर का नाम जुड़वाया था।