
माघ मेले में सफाई
इलाहाबाद. संगम तट पर लगने वाले माघ मेले को आने वाले कुंभ मेले का रिहर्सल माना जा रहा है। इसी को ध्यान मंें रख कई चीजों को प्रयोग को तौर पर इसबार के माघ मेले में किया जा रहा है। इसमें स्वच्छता अभियान को विशेष रूप से तवज्जो दी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए रिहर्सल के तौर पर टाटा एस गाड़ियों, लाइनर बैंगों, काम्पेक्टर सहित अन्य चीजों का प्रयोग किया जा रहा है।
इलाहाबाद में अगले साल लगने वाले कुंभ को लेकर केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक काफी गंभीर है। कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर इलाहाबाद में पिछले काफी समय से तेजी से कार्य चल रहा है। ताकि पूरे विश्व में मानचित्र पर इलाहाबाद के कुंभ मेले को विशेष पहचान मिल सके। इसी को ध्यान में रख इस बार के माघ मेले को रिहर्सल के तौर पर देखा जा रहा है।
कुंभ मेले में किसी भी व्यवस्था या सुविधा को लागू करने से पहले इस बार के माघ मेले में उसका ट्रायल किया जा रहा है। आने वाले कुंभ मेले में स्वच्छता अभियान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते माघ मेले में स्वच्छता के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं। जिसे कुंभ मेले में लागू किया जा सके। इस बार माघ मेले में स्वच्छता के लिए 9 टाटा एस गाडियां लगायी गई है। जो लाइनर लगे डस्टबिनों से कचड़ा उठाकर काम्पेक्टर तक पहुंचाती हैं।
काम्पेक्टर कचरे को मेला क्षेत्र से बाहर करते रहे। मेला क्षेत्र के सेक्टर 1 को कुम्भ का माडल सेक्टर बनाकर यह अभूतपूर्व प्रयोग आज किया गया। सफाई की इस तकनीकी को मण्डलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल, अपर निदेशक स्वास्थ्य, यूपीएचएसपीसी की सलाहकार सलोनी गोयल, सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा, सीडीओ सैमुअल पाल एन सहित अन्य अधिकारियों ने नजदीक से देखा।
इस दौरान सीएमओ ने मौजूद अधिकारियों को बताया कि मेला क्षेत्र के सेक्टर 1 मे लाइनर लगे 1000 से अधिक डस्टबिन लगाये गये हैं। इसी प्रकार के डस्टबिन सभी एप्रोच रोड पर भी लगाये गये हैं। इन डस्टबिनों के भर जाने पर लाइनर बैगों को उठाकर टाटा एस गाडियों के द्वारा संगम अपर क्षेत्र व परेड क्षेत्र में खड़े काम्पेक्टर में कूडे को डम्प किया जा रहा है। वहंा से काम्पेक्टर कचरे को मेला क्षेत्र से बाहर कर रही है।
इस प्रक्रिया में एक भी कचरा मेला क्षेत्र में नहीं गिर रहा है। वहीं पहली बार फाइबर शीट के शौचालय व प्लास्टिक टंकियों के सेफ्टी टैंक का भी प्रयोग किया जा रहा है। मेला क्षेत्र को जल प्रदूषण व खुले में शौच से मुक्त रखने के लिए कई अन्य प्रयोग किए जा रहे हैं।
Published on:
02 Jan 2018 09:53 pm
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