
Mahakumbh 2025: प्रयागराज के संगम की रेती पर 13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ बुधवार को महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान के साथ सम्पन्न हो गया। इस दौरान दुनिया भर से आए श्रद्धालुओं और मेहमानों ने सनातन धर्म के इस महान आयोजन का अनुभव किया। महाकुंभ में आए श्रद्धालु संगम की रज और त्रिवेणी का पवित्र जल अपने साथ ले गए। प्रयागराज मेला प्राधिकरण की विशेष पहल के तहत 143 देशों में पवित्र अक्षयवट के पत्ते भेजे गए।
दरअसल, खास मेहमानों के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण की पहल पर 200 विशेष बॉक्स तैयार करवाए गए थे। जिसमें पवित्र अक्षयवट के पत्ते और संगम का जल एक कलश में भरकर रखा गया था। सीडीओ के निर्देश पर एनआरएलएम की टीम ने इस बॉक्स को तैयार किया था।
महाकुंभ में 73 देशों के राजनयिकों और 70 अन्य देशों से आए अतिथियों को ये पवित्र स्मृति बॉक्स भेंट किए गए, ताकि वे इस धार्मिक आयोजन की पावन अनुभूति अपने देश तक ले जा सकें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एनएलआरएम के जिला मिशन प्रबंधक शरद कुमार सिंह ने बताया कि किन अतिथियों को यह बॉक्स दिया जाना है इसकी सूची प्रतिदिन उन्हें सीडीओ की ओर से दी गई। जिसके बाद इसे तैयार कराकर मेला प्राधिकरण भेजा जाता था।
पर्यटन विभाग की ओर से दावा किया जा रहा है कि आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अमेरिका, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रिका, नेपाल, श्रीलंका सहित अन्य देशों से चार करोड़ से अधिक विदेशी प्रयागराज पहुंचे हैं। अफसरों का कहना है कि यह आंकड़ा 15 फरवरी तक का है। अंतिम तौर पर आकलन के बाद यह संख्या और बढ़ेगी।
Updated on:
27 Feb 2025 09:41 am
Published on:
27 Feb 2025 09:35 am
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