
Mahakumbh: महाकुंभ 2025 से पहले प्रयागराज शहर में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई 103 सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। गड्ढों और टूट-फूट की शिकायतों के बीच अब इन परियोजनाओं की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी। यह फैसला मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने लिया है।
मंडलायुक्त की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ समेत अन्य अधिकारी भाग लेंगे। इस बैठक में तय किया जाएगा कि किन एसडीएम को जांच की जिम्मेदारी दी जाएगी और उनके साथ किन विभागों के अभियंता रहेंगे।
महाकुंभ के मद्देनजर नगर निगम और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने शहर और आसपास के इलाकों — जैसे नैनी, झूंसी और फाफामऊ — में सड़क निर्माण के कार्य कराए थे। इन सड़कों के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अब इन सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे दिखने लगे हैं और डामर की परतें उखड़ने लगी हैं।
इन्हीं शिकायतों के बाद अप्रैल महीने में मंडलायुक्त ने विभिन्न विभागों के 21 वरिष्ठ अभियंताओं की एक जांच समिति गठित की थी। समिति को 10 मई तक अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसकी समीक्षा दो अपर आयुक्तों और दो एडीएम ने की। लेकिन रिपोर्ट में स्पष्टता की कमी होने के कारण मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अब मजिस्ट्रेटों से जांच कराने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को होने वाली बैठक में पहले की जांच समितियों के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि आगे की जांच कैसे और कितने समय में पूरी की जाएगी। मंडलायुक्त ने दो टूक कहा है कि जिन सड़कों में निर्माण मानकों की अनदेखी की गई है, वहां जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
महाकुंभ जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पहले शहर की तैयारियों पर उठ रहे सवाल प्रशासनिक सतर्कता की मांग कर रहे हैं। यह मजिस्ट्रेटी जांच आने वाले दिनों में नगर विकास योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
Published on:
21 May 2025 07:47 am
बड़ी खबरें
View Allप्रयागराज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
