अस्करी ने बताया कि दो दुलदुल जुलूस सजाये जायेंगे। पहला पान दरीबा तो दूसरा रानीमण्डी में सजेगा जो एक ही वक्त में निर्धारित समय पर लोगों के घर जायेगा। वहीं रानीमण्डी से मातमी दस्तों का जंजीरी जुलूस भी रात्रि 9 बजे के स्थान पर सांय तीन बजे निकलेगा, रानीमण्डी, बच्चाजी धर्मशाला, कोतवाली, लोकनाथ चैराहा, बहादुरगंज होते हुए चक स्थित इमाम बाड़ा वजीर हसन पर पहुंच कर सम्पन्न होगा। अस्करी ने फैसले की सराहना करते हुये उनके ऐतिहासिक कदम पर कहा कि यह भारतीय परम्परा का अनूठा नमूना होगा कि एक ओर रामधुन तो दूसरी ओर या अली या हुसैन की सदा फिजा में गूंजेगी। अल्लाह हमारी एकता को दुश्मन के नापाक इरादों से बचाएं ।