
Naga Sadhwi
इलाहाबाद. सनातन धर्म योग, ध्यान और समाधि के कारण हमेशा से विदेशियों को आकर्षित करता रहा है। लेकिन अब बड़ी तेजी से विदेशी खासकर यूरोप की महिलाओं के बीच नागा साधु बनने का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। यूपी में इलाहाबाद में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर चल रहे महाकुंभ मेले में विदेशी महिला नागा साधु आकर्षण के केंद्र बनती हैं। यह जानते हुए भी कि नागा बनने के लिए कई कठिन प्रक्रिया और तपस्या से गुजरना होता है, विदेशी महिलाओं ने इसे अपनाया है।
नागा साधु को चुनना होता है पांच गुरू
उनका कहना है कि महिलाएं कुछ चीजे अलग से करना चाहती है। जूना अखाड़े के इष्टदेव भगवान दत्तात्रेय है। हम अपना इष्टदेव दत्तात्रेय की मां अनुसूया को बनाना चाहते हैं। भगवा कपड़ों में लिपटी दिव्या बताती है अभी भी अखाड़ों में पुरुष और महिलाओं में बराबरी नहीं आई है। फ्रांस की एक अन्य महिला अपना पुराना नाम नहीं बतातीं, लेकिन दीक्षा लेने के बाद उनका नाम अब संगम गिरि है। संगम गिरि ने अपने लिए महिला गुरुओं की तलाश शुरू कर दी है। एक नागा साधु को पांच गुरु चुनने होते हैं।
विदेशी साध्वियों की संख्या
कुंभ में नेपाल से बहुत सी महिलाएं आती हैं। इनमें कई साध्वियां ऐसी भी होती हैं जो ग्रहस्थ जीवन को त्यागकर साध्वी बन गई होती हैं। जूना अखाड़े में इस तरह की अनेक साध्वियां हैं। इसके लगावा जर्मनी, मास्को, अमेरिका समेत अन्य देशों की महिलाओं ने भी संतत्व अपना लिया है। इनमें कई नई उम्र की युवतियां भी शामिल हैं, जो उच्च शिक्षित भी हैं। इन्हें हरि भजन के अलावा अन्य किसी से कोई मतलब नहीं हैं। ये सभी साध्वियां अखाड़ा के नियमों के नियमों के अनुसार ही पहनावा व तिलक आदि का श्रंगार करती हैं।
प्रयाग से शुरू हुई परम्परा
पहले नागा साध्वियों को नागा साधुओं की तर्ज पर कुंभ में स्नान की अनुमति नहीं थी। तीन साल पहले तीर्थराज प्रयाग यानी इलाहाबाद में महिला नागा साध्वियों को कुंभ में स्नान और अखाड़ा बनाने की अनुमति दी गई थी। उलेखनीय है कि प्रयाग के महाकुंभ में ही पहली बार पंचायती महानिवार्णी अखाड़ा द्वारा साध्वी वेदगिरी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी।
ऐसी होती है नागा साध्वियों की वेष-भूषा
नागा साध्वियों के अधिकांश नियम नागा साधुओं की तरह ही होते हैं, लेकिन महिला साध्वियों को पूर्ण नग्न रहने की इजाजत नहीं है। वे देह पर एक भगवा कपड़ा लपेटकर रखती हैं। ठंड हो या फिर बरसात, हर मौसम में यही एक मात्र उनकी पोशाक है। तीर्थों में उन्हें नग्न स्नान करने की अनुमति नहीं है। एक सवाल पर साध्वी ने बताया कि काम, वासनाएं उन लोगों को पीछा करती हैं, जो सत्य से परे हैं। सत्य को जानने वाला तो विवाहित होते हुए भी ब्रम्हचारी बन सकता है। भगवान कृष्ण की तरह। उन्होंने कहा कि अपने आवास या अखाड़ों में नागा साध्वियां अधोवस्त्रों में रहती हैं। ब्रम्हचर्य ही उनकी शक्ति है। जिसने इस शक्ति को पहचान लिया, उसके लिए दुनिया की दूसरी ताकतें गौण हो जाती हैं।
Published on:
07 Jan 2019 11:53 am
बड़ी खबरें
View Allप्रयागराज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
