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Magh Mela 2026: माघ मेले में सतुआ बाबा बने आकर्षण का केंद्र, सादगी के साथ तीन करोड़ की कार ने खींचा ध्यान

Magh Mela Prayagraj: प्रयागराज माघ मेले में साधु-संतों के हाईटेक शिविर और लग्जरी साधन चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी क्रम में युवा संत सतुआ बाबा अपनी सादगी, ब्रांडेड चश्मे और करीब तीन करोड़ रुपये की लग्जरी कार के कारण श्रद्धालुओं और मीडिया के बीच आकर्षण का केंद्र बने हैं।

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तीन करोड़ की कार और ब्रांडेड चश्मा, साधारण वेश, लेकिन लग्जरी साधनों ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

तीन करोड़ की कार और ब्रांडेड चश्मा, साधारण वेश, लेकिन लग्जरी साधनों ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

  Magh Mela Luxury Meets Spirituality: संगम की पावन धरती प्रयागराज में आयोजित माघ मेला इन दिनों पूरे शबाब पर है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर देश-विदेश से आए साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। जहां एक ओर साधना, तपस्या और वैराग्य का वातावरण है, वहीं दूसरी ओर साधु-संतों के हाईटेक शिविर, आधुनिक व्यवस्थाएं और लग्जरी साधन भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन्हीं चर्चाओं के केंद्र में इन दिनों एक युवा संत सतुआ बाबा हैं, जो अपने साधारण पहनावे के बावजूद ब्रांडेड चश्मे और करोड़ों की लग्जरी कार को लेकर सुर्खियों में हैं।

सादगी में भी अलग पहचान

पीठ काशी के पीठाधीश्वर जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से सतुआ बाबा के नाम से जानते हैं, माघ मेले में अपने अनोखे अंदाज के कारण विशेष आकर्षण बने हुए हैं। बाबा का पहनावा पूरी तरह सादा है-साधारण वस्त्र, शांत चेहरा और सहज व्यवहार। लेकिन उनकी आंखों पर लगा मशहूर ब्रांड रे-बैन का चश्मा और शिविर के बाहर खड़ी लग्जरी कार हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पहली नजर में बाबा पूरी तरह पारंपरिक संत जैसे प्रतीत होते हैं, लेकिन जैसे ही नजर उनके चश्मे या शिविर के बाहर खड़ी कार पर जाती है, लोग चौंक जाते हैं।

माघ मेले की सबसे महंगी कार

माघ मेले के खाक चौक क्षेत्र में सतुआ बाबा के शिविर के बाहर खड़ी एक शानदार लैंड रोवर डिफेंडर इन दिनों चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि यह कार माघ मेले में आए साधु-संतों के बीच मौजूद सबसे महंगी कार है।

जानकारी के अनुसार, इस कार की कीमत लगभग 2 करोड़ 85 लाख रुपये बताई जा रही है। वहीं, रजिस्ट्रेशन, टैक्स और अन्य खर्चों को जोड़ने के बाद इसकी कुल कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक हो जाती है। इतनी महंगी कार को साधु-संत के शिविर के बाहर देखकर लोग हैरान भी हैं और उत्सुक भी।

श्रद्धालुओं के लिए सेल्फी प्वाइंट बना शिविर

जैसे-जैसे श्रद्धालुओं को इस लग्जरी कार की कीमत और खासियतों की जानकारी मिल रही है, वैसे-वैसे सतुआ बाबा का शिविर भीड़ का केंद्र बनता जा रहा है। कई श्रद्धालु तो केवल इस कार को देखने और उसके साथ फोटो या सेल्फी लेने के लिए ही बाबा के शिविर तक पहुंच रहे हैं। कार के आसपास दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। कुछ लोग इसे आधुनिक संतों का बदलता स्वरूप मान रहे हैं, तो कुछ इसे मेले का एक अलग आकर्षण बता रहे हैं।

हरिद्वार आरटीओ में हुआ रजिस्ट्रेशन

सूत्रों के मुताबिक, इस लग्जरी लैंड रोवर डिफेंडर कार का रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड के हरिद्वार आरटीओ से कराया गया है। उत्तराखंड नंबर की इस कार को देखकर कई श्रद्धालु इसकी तकनीकी विशेषताओं और कीमत को लेकर आपस में चर्चा करते नजर आते हैं। कार की मजबूती, लग्जरी इंटीरियर और ऑफ-रोड क्षमता भी लोगों के आकर्षण का कारण बनी हुई है।

मीडिया के सवाल पर बाबा का सहज जवाब

जब मीडिया ने सतुआ बाबा से उनकी लग्जरी कार और उसकी कीमत को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सहज और सरल अंदाज में जवाब दिया। बाबा ने कहा कि उन्हें कार की कीमत की ज्यादा जानकारी नहीं है और इच्छुक लोग गूगल पर देखकर इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, बाबा इस विषय पर किसी भी तरह की विस्तृत टिप्पणी करने से बचते नजर आए। उनका कहना था कि साधु का जीवन बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि आंतरिक साधना से जुड़ा होता है।

हाईटेक होते साधु-संतों के शिविर

इस बार माघ मेले में केवल सतुआ बाबा ही नहीं, बल्कि कई अन्य साधु-संतों के हाईटेक शिविर, आधुनिक सुविधाएं और लग्जरी साधन भी देखने को मिल रहे हैं। वातानुकूलित टेंट, आधुनिक बेड, जनरेटर, सीसीटीवी और महंगे वाहन अब माघ मेले का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कुछ लोग इसे समय के साथ बदलाव और सुविधाओं की आवश्यकता मान रहे हैं, तो कुछ इसे परंपरागत साधु जीवन से हटकर दिखावा और आकर्षण का माध्यम बता रहे हैं।

संतों के बदलते स्वरूप पर बहस

सतुआ बाबा की लग्जरी कार और ब्रांडेड चश्मे ने साधु-संतों के बदलते स्वरूप पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक वर्ग का मानना है कि संतों का जीवन त्याग और सादगी का प्रतीक होना चाहिए, वहीं दूसरा वर्ग कहता है कि आधुनिक सुविधाओं का उपयोग साधना के विरुद्ध नहीं है। कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि बाबा का जीवन आचरण और विचारों से पवित्र है, तो उनके पास आधुनिक साधनों का होना कोई अपराध नहीं है।

आस्था और आधुनिकता का संगम

माघ मेला हमेशा से आस्था, परंपरा और अध्यात्म का प्रतीक रहा है। लेकिन बदलते समय के साथ इसमें आधुनिकता की झलक भी साफ दिखाई देने लगी है। सतुआ बाबा का शिविर इसी बदलाव का एक उदाहरण बन गया है, जहां साधना और आधुनिकता एक साथ नजर आती हैं। श्रद्धालु जहां संगम में स्नान कर आध्यात्मिक शांति की अनुभूति कर रहे हैं, वहीं माघ मेले के ये दृश्य उन्हें वर्तमान समय की सामाजिक वास्तविकता से भी रूबरू करा रहे हैं।

चर्चा का विषय बने रहेंगे सतुआ बाबा

फिलहाल, माघ मेले में सतुआ बाबा अपनी सादगी, ब्रांडेड चश्मे और करोड़ों की कार के कारण चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे माघ मेले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे उनका शिविर भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बना रहेगा। आस्था, आधुनिकता और संतों के बदलते स्वरूप के बीच सतुआ बाबा माघ मेले का एक ऐसा चेहरा बन गए हैं, जिसे देखकर हर कोई कुछ न कुछ सोचने को मजबूर हो जाता है।


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